रिपोर्ट गोपाल सक्सेना |
शमसाबाद/कायमगंज।
गंगा की बाढ़ और तेज कटान से तबाही झेल रहे समैचीपुर चितार गांव में जिला प्रशासन ने सोमवार को राहत अभियान चलाकर प्रभावित ग्रामीणों को राहत और भोजन सामग्री उपलब्ध कराई। एक दिन पहले गांव में गंगा के कटान से 15 पक्के मकानों के गंगा में समा जाने और दर्जनों परिवारों के बेघर होने की खबर सामने आने के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मौके पर रेस्क्यू अभियान चलाया।

जिला प्रशासन की टीम ने गांव में पहुंचकर बाढ़ प्रभावित लोगों की स्थिति का जायजा लिया और रेस्क्यू अभियान पूर्ण कराया। इसके बाद प्रभावित परिवारों को राहत एवं भोजन सामग्री वितरित की गई। राहत मिलने से बाढ़ की मार झेल रहे ग्रामीणों को तत्कालिक राहत मिली है।
राहत वितरण के दौरान अपर जिलाधिकारी फर्रुखाबाद अरुण कुमार, क्षेत्राधिकारी मोहम्मदाबाद अजय वर्मा और नायब तहसीलदार मोहम्मद हसीन मौके पर मौजूद रहे। अधिकारियों ने बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों से उनकी समस्याओं की जानकारी ली और जरूरतमंद परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाई।

एक दिन में 15 मकान गंगा में समा गए थे
समैचीपुर चितार में गंगा का कटान लगातार गंभीर रूप ले रहा है। रविवार को ही एक दिन में करीब 15 पक्के मकान गंगा की धारा में समा गए थे, जबकि इससे पहले शनिवार को भी तीन मकान कटान की चपेट में आए थे। लेखपाल के अनुसार 16 अगस्त से अब तक करीब 35 पक्के मकान और 25 झोपड़ियां कटान में प्रभावित हो चुकी हैं।
मकानों के गंगा में समाने से कई परिवार बेघर हो गए हैं और ग्रामीणों को पड़ोसियों, परिचितों व रिश्तेदारों के यहां शरण लेनी पड़ रही है। बाढ़ के कारण गांव चारों ओर से पानी से घिरा होने के चलते भोजन, पीने के पानी, ईंधन और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई थीं।
राशन खत्म होने के बाद बढ़ी थी परेशानी
ग्रामीणों के अनुसार करीब एक माह पहले प्रशासन की ओर से गांव में 414 पैकेट राशन सामग्री उपलब्ध कराई गई थी, जो कुछ ही दिनों में समाप्त हो गई थी। इसके बाद पर्याप्त राहत सामग्री नहीं पहुंचने से प्रभावित परिवारों के सामने भोजन का संकट खड़ा हो गया था। लगातार बारिश के कारण ईंधन गीला होने से खाना पकाने में भी परेशानी हो रही थी।
इसके अलावा गांव में गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर भी ग्रामीण चिंतित थे। स्वास्थ्य शिविर के बाद दोबारा मेडिकल टीम नहीं पहुंचने की शिकायत भी ग्रामीणों ने उठाई थी।
प्रशासन ने दिखाई तत्परता
ग्रामीणों की समस्याओं और गंगा के कटान से हुई तबाही की सूचना के बाद जिला प्रशासन ने तत्काल संज्ञान लिया। सोमवार को अधिकारियों की मौजूदगी में रेस्क्यू अभियान पूरा कराते हुए प्रभावित परिवारों तक राहत और भोजन सामग्री पहुंचाई गई।
प्रशासन की इस कार्रवाई से ग्रामीणों को तत्काल राहत मिली है। हालांकि गंगा का कटान अब भी ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ी चिंता बना हुआ है। ग्रामीणों ने मांग की है कि राहत सामग्री की नियमित व्यवस्था के साथ कटान रोकने के लिए भी प्रभावी कदम उठाए जाएं, ताकि बचे हुए मकानों और परिवारों को उजड़ने से बचाया जा सके।

