अमृतपुर/फर्रुखाबाद ।
चार से पांच फीट पानी के बीच आवागमन को मजबूर ग्रामीण, घरों तक पहुंचा बाढ़ का पानी; न मेडिकल कैंप, न राहत सामग्री—बीमार मासूम को दवा तक के लिए भटकना पड़ा
अमृतपुर क्षेत्र के फखरपुर जालिम गांव में बाढ़ का संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक गांव करीब 21 दिनों से बाढ़ के पानी से घिरा हुआ है। मुख्य रास्तों पर चार से पांच फीट तक पानी भरा होने के कारण ग्रामीणों को बेहद मुश्किल हालात में आवागमन करना पड़ रहा है। अब बाढ़ का पानी गांव के घरों तक पहुंचने से लोगों की चिंता और बढ़ गई है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि तीन सप्ताह से बाढ़ की मार झेल रहे इस गांव तक राहत व्यवस्था आखिर कब पहुंचेगी? ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में अभी तक न तो मेडिकल कैंप लगाया गया है और न ही पर्याप्त राहत सामग्री का वितरण किया गया है। दवाइयों और जरूरी स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में बाढ़ के बीच बीमार पड़ने वाले लोगों की परेशानी और बढ़ गई है।
तेज बुखार से तपता रहा सात माह का मासूम

बाढ़ के बीच रिंकू की पत्नी कीर्ति के सात माह के बच्चे आरुष की तबीयत बिगड़ गई और उसे तेज बुखार हो गया। गांव में स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण परिजनों को दवा के इंतजाम के लिए काफी परेशानी उठानी पड़ी। इस घटना ने बाढ़ प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि जब सामान्य बीमारी में दवा के लिए इतनी परेशानी हो रही है, तो किसी व्यक्ति की हालत अचानक गंभीर होने पर उसे अस्पताल तक पहुंचाना कितना मुश्किल होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। चार से पांच फीट पानी के बीच बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों का निकलना भी किसी जोखिम से कम नहीं है।
आश्वासन नहीं, अब जमीन पर राहत की मांग
ग्रामीणों के अनुसार बाढ़ ने गांव की रोजमर्रा की जिंदगी को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। आवागमन बाधित है और जरूरी सामान तथा स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल मेडिकल टीम भेजने, आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराने, राहत सामग्री वितरित कराने और सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था करने की मांग की है।
21 दिन से पानी के बीच जिंदगी गुजार रहे फखरपुर जालिम के ग्रामीण अब सवाल कर रहे हैं—क्या उनकी परेशानी प्रशासन की नजर में नहीं आ रही, या फिर राहत पहुंचने के लिए उन्हें और इंतजार करना पड़ेगा?

