जिन्दगी पर भारी पड़ती मोबाइल की लत

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जिन्दगी पर भारी पड़ती मोबाइल की लत

■ मनोज कुमार अग्रवाल

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मोबाइल की लत बच्चों की दिनचर्या को एक दशक से बुरी तरह से प्रभावित कर रही है लेकिन अब तो यह जिन्दगी पर भी भारी पड़ने लगी है महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में एक महंगे आईफोन को पाने और उसकी किस्त चुकाने की एक किशोर छात्र की जिद में हंसते-खेलते परिवार के तीन सदस्यों की मौत हो गई। पिछले दिनों हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में एक मां ने गेम न खेलने और मोबाइल फोन देने से इनकार किया तो 14 वर्षीय बेटे ने खुदकुशी कर ली। स्मार्ट फोन और इंटरनेट के दौर में अक्सर बच्चे मोबाइल फोन के एडिक्ट हो रहे हैं। खासकर बच्चे सबसे ज्यादा शिकार हो रहे हैं। मोबाइल एडिक्शन वर्तमान समय में एक बेहद गंभीर समस्या बन चुका है। इस एडिक्शन की वजह से मानसिक तनाव, नींद की कमी से युवाओं और बच्चों में शारीरिक एवं मानसिक विकास पर बुरा असर पड़ रहा है।

हाल के दिनों में मोबाइल फोन के अत्यधिक इस्तेमाल, विवाद या लत के कारण जान गंवाने की कई दर्दनाक घटनाएं सामने आई हैं। महाराष्ट्र की घटना ने समूचे देश के अभिभावकों को दहला दिया है। यहां मोबाइल को लेकर हुए विवाद के बाद एक 19 वर्षीय युवक ने पहाड़ से कूदने की धमकी दी। उसे बचाने की कोशिश में पहले उसके पिता और फिर सदमे में आकर मां की भी गहरी खाई में गिरने से मौत हो गई। एक पूरा परिवार एक मोबाइल के चक्कर में दुनिया से चला गया। कई बार तो मोबाइल की खातिर किशोर वय बच्चे बेहद संगीन अपराध को अंजाम दे रहे हैं। केरल में एक अन्य मामले में मोबाइल के इस्तेमाल पर रोक लगाने और डांटने से नाराज 13 वर्षीय बच्ची ने अपने साथियों के साथ मिलकर अपने ही नाना की हत्या करवा दी।

कई जगहों पर बच्चों या युवाओं द्वारा मोबाइल छीनने, फोन पर कहासुनी होने या नया फोन न मिलने पर आत्महत्या करने के दुखद समाचार मिलते रहते हैं।कुछ वारदातें जो हाल ही में सुर्खियों में रहीं जरा उन पर नजर डालते हैं।

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के धर्मशाला में हाल ही में एक 14 साल के लड़के जान दे दी। परिवार ने जब उसे फ्री फायर ऑनलाइन गेम खेलने से रोका तो नाराज होकर किशोर ने आत्मघाती कदम उठा लिया। फिलहाल, परिवार ने किसी पर कोई शक नहीं जताया है। पिता रवि कुमार ने बताया कि प्रिंस लगातार अपनी मां से मोबाइल फोन मांग रहा था, ताकि वह गेम खेल सके। मां ने उसे मोबाइल नहीं दिया और इसके बाद प्रिंस नाराज होकर अपने कमरे में चला गया परिवार ने यह कल्पना भी नहीं की थी कि नाराजगी में वह इतना बड़ा कदम उठा लेगा।प्रिंस के पिता रवि कुमार ने घटना के बाद अन्य अभिभावकों से भावुक अपील करते हुए कहा कि उनका बेटा तो चला गया, लेकिन किसी और का बच्चा ऐसी घटना का शिकार न हो उन्होंने माता-पिता से बच्चों को मोबाइल फोन और गेमिंग की लत से दूर रखने का आग्रह किया।

बिलासपुर छत्तीसगढ़ में भी एक दुखद घटना सामने आई है, जहां खराब मोबाइल तुरंत ठीक नहीं होने से नाराज 9वीं की छात्रा ने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना के समय पिता काम पर गए हुए थे। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार छात्रा अपने खराब मोबाइल को लेकर परेशान थी। पिता ने पैसे मिलने के बाद मोबाइल ठीक कराने की बात कही थी, जिसके कुछ देर बाद छात्रा ने यह आत्मघाती कदम उठा लिया।

छत्तीसगढ़ में कबीरधाम जिले में दो अगस्त को एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। आठवीं कक्षा में पढ़ने वाली 14 साल की छात्रा ने मोबाइल चलाने को लेकर परिवार की डांट फटकार के बाद अपनी जान दे दी। घटना के बाद परिवार में मातम पसर गया।

3 अगस्त को यूपी के श्रावस्ती जिले में एक 16 वर्षीय छात्रा ने मोबाइल देखने को लेकर माँ की डांट से क्षुब्ध होकर फांसी लगा कर जान दे दी। बाराबंकी जिले के करौंदा गांव में मोबाइल फोन का प्रयोग करने से मना किए जाने पर एक किशोर छात्रा ने गांव के सामुदायिक शौचालय में फंदे से लटक कर जान दे दी।

वाराणसी में सिगरा थाना अंतर्गत लल्लापुरा क्षेत्र में एक मां ने अपनी बेटी को फोन पर ज्यादा बात करने से मना किया था, इसके बाद गुस्से में आकर बेटी ने फंदे से लटक कर अपनी जान दे दी।

उरई के कोंच कस्बे के पटेल नगर में एक माह पहले संदिग्ध परिस्थितियों में 17 वर्षीय छात्रा का शव घर के आंगन में साड़ी के फंदे से लटका मिला। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को नीचे उतारकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। घटना की वजह के बारे में बताया जा रहा है कि छात्रा बचपन से ही मामा के घर रह रही थी और मोबाइल पर बात करने को लेकर मामा ने उसे फटकारा था।

केरल के चलक्का में 13 वर्षीय एक लड़की अपने घर में फंदे से लटकी मिली। उसके माता-पिता ने उसे मोबाइल फोन इस्तेमाल करने से कथित तौर पर रोका था, जिसके बाद यह घटना हुई।

ये तो सिर्फ कुछ बानगी है देश भर में हर दिन बच्चे मोबाइल की लत के चलते जान गंवा रहे हैं। बच्चों में मोबाइल फोन की लत और उसके कारण होने वाले गंभीर परिणाम आज एक बेहद चिंताजनक सामाजिक समस्या बन चुके हैं। अत्यधिक स्क्रीन टाइम और ऑनलाइन गेम बच्चों में गुस्सा, आक्रामकता और मानसिक तनाव बढ़ा रहे हैं। कई बार मनपसंद फोन न मिलने या गेम के खतरनाक जाल में फंसकर बच्चे अपनी जान तक जोखिम में डाल लेते हैं और आत्मघाती कदम उठा रहे हैं। मोबाइल बच्चों के शारीरिक तथा मानसिक विकास में बाधक है इससे बच्चों की आंखें कमजोर होती हैं, नींद की कमी होती है और लिखना,पढ़ना व भाषाई विकास धीमा पड़ जाता है।

अपने बच्चों के भविष्य को बचाने के लिए जरूरी है कि माता पिता खुद जरूरत के अनुसार मोबाइल का उपयोग करें। बच्चे वही सीखते हैं जो वे अपने माता-पिता को करते देखते हैं।जब माता-पिता खुद रील स्क्रॉल करते रहेंगे या ओटीटी प्लेटफॉर्म पर व्यस्त रहेंगे तो बच्चों को कैसे अनुशासित करेंगे? छोटे बच्चों को फोन देने से बचें और बड़े बच्चों के लिए समय सीमा तय करें। इतना ही नहीं बच्चों को बाहर पार्क में खेलने के लिए प्रेरित करें और उन्हें किताबें या खिलौने दें।उनकी रूचि मोबाइल से हटाकर किसी कला,गार्डनिंग, पढ़ाई, खेल आदि के लिए प्रेरित करें। कई देशों ने मोबाइल के बच्चों के विकास पर घातक परिणामों को देखते हुए बच्चों के मोबाइल यूज पर पाबंदी लगा दी है कुछ ने समय सीमा तय की है। भारत सरकार को भी जेन अल्फा पीढ़ी बच्चों और किशोरों के संतुलित और स्वस्थ विकास के लिए इस ओर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। *(विभूति फीचर्स)*

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