वृहद वृक्षारोपण महाअभियान-2026 की तैयारियों की समीक्षा, गंगा एवं पर्यावरण संरक्षण को लेकर डीएम ने दिए सख्त निर्देश
एटा। जिलाधिकारी अरविन्द सिंह की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में जिला वृक्षारोपण, पर्यावरणीय समिति एवं जिला गंगा समिति की संयुक्त बैठक संपन्न हुई। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी राजेन्द्र प्रसाद मिश्रा, प्रभागीय वनाधिकारी विपिन वर्मा, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. राजेन्द्र प्रसाद सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में जिलाधिकारी ने वर्षाकाल 2026 में प्रस्तावित वृहद वृक्षारोपण महाअभियान की तैयारियों की गहन समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि जनपद एटा को इस वर्ष 26,66,105 पौधे रोपित किए जाने का लक्ष्य प्राप्त हुआ है। इसके सापेक्ष सभी संबंधित विभागों को समय से गड्ढा खोदाई (पिट डिगिंग) की सूचना उपलब्ध कराने तथा कार्य में शत-प्रतिशत प्रगति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने कहा कि “वृक्षारोपण केवल लक्ष्य पूर्ति तक सीमित न रहे, बल्कि पौधों का संरक्षण एवं उनका जीवित रहना सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए उचित प्रजाति चयन, सुरक्षा एवं नियमित रख-रखाव अत्यंत आवश्यक है।” उन्होंने सभी विभागों को निर्देशित किया कि वृक्षारोपण स्थलों की शत-प्रतिशत जियो टैगिंग सुनिश्चित की जाए तथा विस्तृत कार्ययोजना शीघ्र प्रभागीय वनाधिकारी/संयोजक कार्यालय को उपलब्ध कराई जाए।
उन्होंने वृक्षारोपण अभियान में पीपल, पाकड़, गुलर, बरगद, नीम, महोगनी एवं जामुन जैसी प्रजातियों को प्राथमिकता से शामिल करने के निर्देश दिए, जिससे जैव विविधता का संरक्षण सुनिश्चित हो सके।
जिला गंगा समिति की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि काक नदी के पुनरोद्धार हेतु आवश्यक बजट की मांग प्रस्तावित की जाए तथा नदी के आसपास स्थित 15 ग्राम पंचायतों एवं विद्यालयों में व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया जाए। उन्होंने कहा कि “नदियों का संरक्षण जनभागीदारी के बिना संभव नहीं है, अतः आमजन को इसके प्रति जागरूक करना बेहद जरूरी है।”
जिलाधिकारी ने जिला पंचायत राज अधिकारी को निर्देशित किया कि जन चौपाल के माध्यम से विलुप्तप्राय काक नदी के पुनर्जीवन हेतु ग्राम पंचायत स्तर पर जन चौपाल के माध्यम से जन जागरुकता कराई जाए।
बैठक में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन, कन्स्ट्रक्शन एवं डिमोलिशन वेस्ट प्रबंधन की समीक्षा करते हुए संबंधित विभागों द्वारा प्रस्तुत अनुपालन आख्या का परीक्षण किया गया। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि सभी प्रकार के अपशिष्टों के समुचित निस्तारण हेतु समेकित कार्ययोजना तैयार कर जिला पर्यावरण समिति को उपलब्ध कराई जाए।
उन्होंने विशेष रूप से बायोमेडिकल वेस्ट एवं ई-वेस्ट के सुरक्षित निस्तारण पर जोर देते हुए कहा कि “इन अपशिष्टों को खुले में फेंकना गंभीर पर्यावरणीय एवं स्वास्थ्य जोखिम उत्पन्न करता है, अतः निर्धारित मानकों के अनुसार ही इनका निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।”
बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि पर्यावरण संरक्षण एवं वृक्षारोपण अभियान को जन आंदोलन के रूप में संचालित करते हुए निर्धारित लक्ष्यों की शत-प्रतिशत प्राप्ति सुनिश्चित की जाए बैठक का संचालन आर्यन गौड़ द्वारा किया गया।
