फतेहगढ़।
शहर की ऐतिहासिक और गंगा-जमुनी तहजीब की प्रतीक दरगाह हजरत मखदूम शाह सैय्यद शहाबुद्दीन औलिया अलैहिर्रहमा में बुधवार को 16वीं शरीफ और सातवें सालाना जश्न-ए-उर्स हजरत कुतुबुल अक्ताब प्रो. मुफ़्ती सैयद जियाउद्दीन शम्सी तहरानी रहमतुल्लाह अलैह का आयोजन बेहद श्रद्धा और अकीदत के साथ सम्पन्न हुआ। इस मौके पर विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और समाज में सांप्रदायिक सौहार्द व आपसी भाईचारे की एक अनूठी मिसाल पेश की।
मन्नतें मांगीं और अमन-चैन की दुआएं कीं

उर्स के दौरान दूर-दराज से पहुंचे अकीदतमंदों ने दरगाह शरीफ पर पवित्र फूल और चादर पेश कर मन्नतें मांगीं। नमाज-ए-असर के बाद आयोजित ‘कुल शरीफ’ में बड़ी संख्या में जायरीनों ने शिरकत की। इस दौरान नजर-ओ-नियाज पेश की गई और व्यापक स्तर पर लंगर का वितरण किया गया। श्रद्धालुओं ने देश में अमन, भाईचारे और खुशहाली के लिए विशेष प्रार्थनाएं कीं।
सूफी संतों की शिक्षाओं को अपनाने की जरूरत: मोहम्मद मियां
खानकाह शरीफ के सज्जादा नशीन एवं जानशीन-ए-हुजूर मोहब्बत शाह, पीरजादा शाह मोहम्मद वसीम उर्फ मोहम्मद मियां ने अपने संबोधन में कहा: खानकाहें और दरगाहें सदियों से इंसानियत, मोहब्बत और भाईचारे की शिक्षा देती रही हैं। सूफी संतों ने हमेशा प्रेम, सहिष्णुता और सभी धर्मों के सम्मान का संदेश दिया है। आज समाज में बढ़ती दूरियों को खत्म करने के लिए सूफी संतों की शिक्षाओं को जीवन में अपनाने की सख्त आवश्यकता है।
हजरत शम्सी तहरानी के जीवन पर डाला प्रकाश
दारुल इफ्ता के मुफ़्ती एवं उस्ताद गुलाम आसी साहब ने हजरत प्रो. मुफ़्ती सैयद जियाउद्दीन शम्सी तहरानी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उन्हें इल्म, अमल, तसव्वुफ और इंसानियत की सेवा का प्रतीक बताया।
वक्ताओं ने जानकारी दी कि हजरत शम्सी तहरानी ने अपने प्रमुख खलीफा और जानशीन हजरत ख्वाजा मोहम्मद शरीफ उर्फ मोहब्बत शाह अलैहिर्रहमा को खिलाफत और इजाजत प्रदान की थी। मोहब्बत शाह ने फतेहगढ़ को अपना केंद्र बनाकर दीन, तसव्वुफ और मानव सेवा का कार्य आगे बढ़ाया। वर्तमान में उनके द्वारा नियुक्त जानशीन पीरजादा शाह मोहम्मद वसीम उर्फ मोहम्मद मियां साबरी मुजद्दिदी मजहरी अपने बुजुर्गों के पदचिह्नों पर चलते हुए समाज में अमन का संदेश फैला रहे हैं।
सूफियाना कव्वाली से रूहानी हुआ माहौल
कार्यक्रम की शुरुआत मौलाना शोएब आतिर मदारी, हाफिज अरशद साबरी, हाफिज फरहान साबरी, अयान साबरी एवं आरिश साबरी द्वारा कुरआन पाक की तिलावत के साथ हुई। इसके बाद मशहूर कव्वाल कमालुद्दीन ने एक से बढ़कर एक सूफियाना कलाम प्रस्तुत कर महफिल को रूहानी रंग में रंग दिया। कव्वालियों को सुनकर अकीदतमंद झूम उठे और पूरा माहौल इश्क-ए-रसूल और औलिया-ए-किराम की मोहब्बत से सराबोर हो गया।
ये लोग रहे उपस्थित
कार्यक्रम के अंत में देश की तरक्की और आपसी सद्भाव के लिए सामूहिक दुआ मांगी गई। इस उर्स समारोह में अंसार साबरी, अफजल हुसैन नियाजी, रफत हुसैन, हनीफ भाई, राजू भाई, तनवीर खान, राहुल, फैसल साबरी, आकाश, शिवम सहित बड़ी संख्या में स्थानीय व बाहरी श्रद्धालु और गणमान्य लोग मौजूद रहे।
फतेहगढ़ के इस उर्स समारोह ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सूफी परंपरा केवल एक धार्मिक विरासत नहीं, बल्कि प्रेम, मानवता और सामाजिक सौहार्द का वह जीवंत ताना-बाना है, जो पूरे समाज को एक सूत्र में जोड़ने का कार्य करता है।
