विधुत विभाग की बड़ी लापरवाही: पोल में करंट उतरने से बेजुबान घोड़े की तड़प-तड़प कर मौत |

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Manoj Jauhri
Manoj Jauhri ब्यूरो चीफ (फर्रुखाबाद) - एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो राजनीति, अपराध, शिक्षा, मनोरंजन और स्थानीय समाचारों पर पोस्ट करते हैं। वे तथ्यों पर आधारित...
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रिपोर्ट आलोक गंगवार |

कायमगंज/ फर्रुखाबाद |

विधुत विभाग की लगातार बढ़ती लापरवाही अब आम जनता के जान-माल पर भारी पड़ने लगी है। कस्बे और ग्रामीण इलाकों में फैले तारों के मकड़जाल और जर्जर खंभों को लेकर मीडिया ने पहले ही विभाग को आगाह करते हुए किसी बड़ी अनहोनी की आशंका जताई थी। लेकिन कुंभकरणीय नींद सो रहे बिजली विभाग ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। नतीजा यह हुआ कि शुक्रवार को एक गरीब परिवार की रोजी-रोटी का इकलौता सहारा एक बेजुबान घोड़ा करंट की भेंट चढ़ गया।

कैसे हुआ हादसा?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, दमदमा गांव निवासी मुजफ्फर घोड़े की बुग्गी से ईंट ढुलाई का काम कर अपने परिवार का भरण-पोषण करता है। शुक्रवार को उसने अपने घोड़े को घर के बाहर खूंटे से बांधा हुआ था। दोपहर के समय हुई तेज बारिश के दौरान घोड़ा किसी तरह रस्सी खोलकर निकल गया और पास ही स्थित बिजली के एक पोल के संपर्क में आ गया। बारिश की वजह से पोल में पहले से ही हाई-वोल्टेज करंट उतर रहा था। करंट की चपेट में आते ही बेजुबान घोड़ा तड़पने लगा।

लाचार मालिक के सामने तड़पकर तोड़ा दम

घोड़े को छटपटाता देख राहगीरों ने शोर मचाया और तुरंत बिजली विभाग को सूचना देने की कोशिश की। लेकिन जब तक कोई कार्रवाई होती, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। पीड़ित मुजफ्फर अपनी आंखों के सामने अपने सबसे वफादार और कमाने वाले साथी को तड़प-तड़प कर मरते देखता रहा और कुछ ही देर में घोड़े ने दम तोड़ दिया।

पीड़ित का दर्द: मुजफ्फर ने रोते हुए बताया कि उसने ₹30 हजार का कर्ज लेकर यह घोड़ा खरीदा था। वह बग्गी चलाकर ही अपने पूरे परिवार का पेट पालता था। घोड़े की मौत के बाद अब उसके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है और वह कर्ज कैसे चुकाएगा, यह बड़ा सवाल है।

मीडिया की खबरों को ठेंगा, आखिर कब जागेंगे जिम्मेदार अधिकारी?

कायमगंज नगर और आसपास के इलाकों में झूलते हुए जर्जर तार और पोलों पर बने ‘मक्खियों के जाले’ जैसे खतरनाक हालात किसी से छुपे नहीं हैं। मीडिया लगातार अपनी खबरों के माध्यम से इस ओर ध्यान आकर्षित कर रहा है, लेकिन बिजली विभाग के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। सुधार तो दूर, अधिकारी इस ओर देखना भी ग्वारा नहीं कर रहे हैं।

उठते गंभीर सवाल:

इस दर्दनाक हादसे ने बिजली विभाग की कार्यशैली पर एक बार फिर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है:

  1. क्या विभाग को किसी इंसान की जान जाने का इंतजार है?
  2. पीड़ित मुजफ्फर के भारी आर्थिक नुकसान की भरपाई कौन करेगा?
  3. लापरवाह अधिकारियों और कर्मचारियों पर कब होगी सख्त कार्रवाई?

अब देखना यह है कि बिजली विभाग अपने इस ‘हाई-वोल्टेज ड्रामे’ और लापरवाही से बाहर निकलकर जनता को इस मकड़जाल से निजात दिलाता है, या फिर किसी और बड़ी अनहोनी का इंतजार करता रहेगा। फिलहाल, घटना के बाद से बिजली विभाग के आला अधिकारी पूरे मामले पर मौन साधे हुए हैं।

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Manoj Jauhri ब्यूरो चीफ (फर्रुखाबाद) - एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो राजनीति, अपराध, शिक्षा, मनोरंजन और स्थानीय समाचारों पर पोस्ट करते हैं। वे तथ्यों पर आधारित और विश्वसनीय समाचार सामग्री तैयार करने में विशेषज्ञता रखते हैं।
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