भारत की विदेश नीति 'नष्ट' हो चुकी सरकार में मित्र को गलत कहने का साहस नहीं, गठबंधन मजबूरी नहीं, राजनीतिक वास्तविकता है: सलमान खुर्शीद ​

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Manoj Jauhri
Manoj Jauhri ब्यूरो चीफ (फर्रुखाबाद) - एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो राजनीति, अपराध, शिक्षा, मनोरंजन और स्थानीय समाचारों पर पोस्ट करते हैं। वे तथ्यों पर आधारित...
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कायमगंज |

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने विदेश नीति और गठबंधन पर बेबाकी से अपनी बात रखते हुए कहा कि क्या भारत अब अपनी मर्जी से फैसले नहीं ले सकता….?

इजराइल-गाजा मुद्दे पर भारत का रुख स्पष्ट क्यों नहीं है। उन्होंने गठबंधन के प्रश्न पर कहा गठबंधन ही आज की सच्चाई है, जिससे देश को 10 साल की सफल UPA सरकार मिली थी। उन्होंने बसपा सुप्रीमो के अकेले चुनाव लड़ने के ऐलान पर भी तंज़ कसते हुए कहा कि उन्हें पिछले अनुभवों को देखना चाहिए।

कायमगंज में अपने शीतगृह पर विदेश मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत की पारंपरिक विदेश नीति पूरी तरह नष्ट हो चुकी है और वर्तमान सरकार ‘सामरिक स्वतंत्रता’ खो चुकी है।

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के संदर्भ में खुर्शीद ने कहा कि आज भारत अपनी शर्तों पर नहीं, बल्कि दूसरों के आदेश पर चल रहा है। उन्होंने रूस से तेल खरीद का उदाहरण देते हुए कहा, “हमसे कहा जा रहा है कि अमेरिका ने 30 दिन की अनुमति दी है। इसका सीधा मतलब है कि हम स्वतः निर्णय लेने में सक्षम नहीं हैं। प्रधानमंत्री कहते हैं कि हम अपनी शर्तों पर काम कर रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि सामने वाला जो कह रहा है, उसे मान लेना ‘शर्त’ नहीं, ‘समर्पण है।

​गाजा में हो रही मौतों पर सरकार के रुख की आलोचना करते हुए खुर्शीद ने कहा कि कांग्रेस हमास के हमले का समर्थन नहीं करती, लेकिन मासूम बच्चों की जान जाने का विरोध करने का साहस भारत को दिखाना चाहिए। उन्होंने पीएम मोदी की इजराइल यात्रा पर सवाल उठाते हुए कहा जब हमला होने वाला था, तब प्रधानमंत्री इजराइल में थे। इजराइल ने भारत को किस बात का धन्यवाद दिया? क्या हमने उन्हें खुली छूट का संकेत दिया था? एक सच्चे मित्र का कर्तव्य है कि वह गलत को गलत कहे, लेकिन इस सरकार में वह साहस नहीं बचा।

​खुर्शीद ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का उदाहरण देते हुए याद दिलाया कि जब चीन ने वियतनाम पर हमला किया था, तब अटल जी अपनी चीन यात्रा बीच में छोड़कर विरोध स्वरूप वापस लौट आए थे।

​गठबंधन के सवाल पर उन्होंने कहा कि कोई खुद को मारकर गठबंधन नहीं करता

​आगामी चुनावों और मायावती के अकेले लड़ने के फैसले पर खुर्शीद ने सधा हुआ रुख अपनाया। उन्होंने कहा

आज की राजनीतिक वास्तविकता यही है कि बड़ी पार्टियां भी गठबंधन के बिना प्रभाव नहीं बना पातीं। यूपीए सरकार भी गठबंधन की ही सफलता थी। उन्होंने कहा कि

गठबंधन में कुछ पाना और कुछ खोना पड़ता है। कोई भी पार्टी खुद को खत्म करके गठबंधन नहीं करती, बल्कि अवाम के फायदे के लिए हाथ मिलाती है। उन्होंने मायावती पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पिछले अनुभवों को देखना चाहिए कि अकेले लड़ने पर क्या परिणाम रहे और गठबंधन के साथ क्या। उन्होंने स्वीकार किया कि गठबंधन में सीटें जाने से कार्यकर्ता निराश होते हैं, लेकिन अंतिम फैसला नेतृत्व को लेना है।

इस दौरान पूर्व विधायक लुईस खुर्शीद, अनिल मिश्रा, मृत्यंजय शुक्ला, शकुंतला देवी, उजैर अली खान, जुबैर खान आदि मौजूद रहे ।

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Manoj Jauhri ब्यूरो चीफ (फर्रुखाबाद) - एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो राजनीति, अपराध, शिक्षा, मनोरंजन और स्थानीय समाचारों पर पोस्ट करते हैं। वे तथ्यों पर आधारित और विश्वसनीय समाचार सामग्री तैयार करने में विशेषज्ञता रखते हैं।
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