फर्रुखाबाद।
गंगा के उफान और कटान से कायमगंज तहसील क्षेत्र के ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। मंगलवार को जिलाधिकारी अंकुर लाठर ने पुलिस अधीक्षक आरती सिंह के साथ बाढ़ प्रभावित समेचीपुर चितार गांव का स्थलीय निरीक्षण किया। डीएम रेस्क्यू टीम के साथ बाढ़ के पानी से भरी गलियों में उतरकर ग्रामीणों के बीच पहुंचीं और उनकी पीड़ा सुनी।

निरीक्षण के दौरान एक महिला ने जिलाधिकारी से अपनी व्यथा बताते हुए कहा, “साहब, रहने की जगह नहीं बची, मकान कट गया।” महिला की फरियाद सुनकर जिलाधिकारी ने ग्रामीणों से बातचीत कर गंगा के कटान से हुए नुकसान की जानकारी ली। ग्रामीणों ने डीएम को बताया कि गंगा के कटान में उनके मकान और आशियाने लगातार समाते जा रहे हैं। ग्रामीणों ने कटे मकानों की जानकारी देते हुए रहने के लिए मकान और सुरक्षित जगह उपलब्ध कराने की मांग की।
ग्रामीणों के अनुसार समेचीपुर चितार गांव में अब तक 38 कच्चे मकान और करीब 25 झोपड़ियां गंगा में समा चुकी हैं। गांव में कटान का खतरा लगातार बना हुआ है। स्थिति को देखते हुए प्रशासन द्वारा सोमवार से राहत एवं बचाव अभियान चलाया जा रहा है। अब तक गांव के 90 लोगों को शमशाबाद मंडी स्थित बाढ़ शरणालय में सुरक्षित पहुंचाया जा चुका है।

54 गांवों की खेती प्रभावित
तहसील प्रशासन के अनुसार कायमगंज तहसील क्षेत्र में 54 गांवों की खेती बाढ़ से प्रभावित है। वहीं 29 गांव ऐसे हैं जहां आबादी और खेती दोनों बाढ़ की चपेट में हैं। प्रशासन द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य लगातार जारी रखा गया है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की आवाजाही और रेस्क्यू के लिए 22 नाव और 9 स्टीमर लगाए गए हैं। प्रशासन की ओर से कुल छह बाढ़ शरणालय बनाए गए हैं, जिनमें फिलहाल दो बाढ़ शरणालय शमशाबाद और कायमगंज मंडी में संचालित किए जा रहे हैं।
शमशाबाद मंडी शरणालय में 130 पशु
प्रशासन ने बाढ़ पीड़ित ग्रामीणों के साथ उनके पशुओं के लिए भी व्यवस्था की है। तहसील प्रशासन के अनुसार शमशाबाद मंडी स्थित बाढ़ शरणालय में करीब 130 पशु रखे गए हैं। इनके लिए चारा और भूसे की व्यवस्था की गई है, ताकि बाढ़ प्रभावित पशुपालकों को परेशानी न हो।
वहीं कायमगंज मंडी स्थित बाढ़ शरणालय में करीब 35 लोग शरण लिए हुए हैं। शरणालयों में प्रभावित परिवारों के लिए भोजन, पेयजल, रहने, पंखे और बिस्तर सहित आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। बच्चों की पढ़ाई की व्यवस्था भी की गई है।
डीएम बोलीं- जान-माल की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
स्थलीय निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता लोगों की जान-माल की सुरक्षा है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि खतरे को देखते हुए सुरक्षित स्थान और बाढ़ शरणालय में चले जाएं।
डीएम ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि बाढ़ और कटान से हुए नुकसान का आकलन कराया जाएगा तथा नियमानुसार प्रभावित परिवारों को आवास एवं अन्य आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि मुश्किल की इस घड़ी में जिला प्रशासन पूरी तरह ग्रामीणों के साथ खड़ा है।
जिलाधिकारी ने एडीएम और तहसील प्रशासन को निर्देश दिए कि बाढ़ प्रभावित लोगों को प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षित बाढ़ शरणालय पहुंचाया जाए और वहां भोजन, पेयजल समेत सभी आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
उपजिलाधिकारी कायमगंज अभिषेक वर्मा ने बताया कि बाढ़ शरणालय में लोगों के रहने, भोजन, पेयजल, बच्चों की पढ़ाई, पंखे और बिस्तर सहित सभी मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था है। इन व्यवस्थाओं का उनके और तहसीलदार द्वारा प्रतिदिन निरीक्षण किया जा रहा है।
सिंचाई विभाग की रिपोर्ट के अनुसार मंगलवार को गंगा का जलस्तर 137.15 गेज मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का निशान 137.10 मीटर है। खतरे के निशान से ऊपर बह रही गंगा के कारण तटीय गांवों में बाढ़ और कटान का खतरा लगातार बना हुआ है।

