रिपोर्ट गोपाल सक्सेना |
फर्रुखाबाद।
फर्रुखाबाद में गंगा और रामगंगा नदियों के बढ़ते जलस्तर ने एक बार फिर ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कायमगंज से लेकर अमृतपुर तहसील क्षेत्र तक बाढ़ का असर दिखाई देने लगा है। कहीं गांवों के रास्ते जलमग्न हैं तो कहीं घरों तक बाढ़ का पानी पहुंच गया है। सबसे गंभीर तस्वीर अमृतपुर के मंझा की मड़ैया गांव से सामने आई है, जहां नाव तो उपलब्ध है, लेकिन नाविक नहीं मिलने पर महिलाओं और किशोरियों ने खुद पतवार थाम ली। दूसरी ओर कायमगंज तहसील में प्रशासन के अनुसार 83 गांव बाढ़ की चपेट में हैं।
सिंचाई विभाग के अनुसार रविवार शाम नरौरा बांध से 96,219 क्यूसेक पानी गंगा नदी में छोड़ा गया। इसके बाद गंगा किनारे बसे गांवों में ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है। जलस्तर बढ़ने की आशंका के बीच प्रशासन ने राहत एवं बचाव कार्य तेज करने का दावा किया है।
83 गांव बाढ़ की चपेट में
तहसील प्रशासन के अनुसार कायमगंज तहसील क्षेत्र के 83 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। इनमें 54 गांवों में केवल खेती प्रभावित हुई है, जबकि 29 गांवों में आबादी के साथ खेती भी बाढ़ की चपेट में है। राहत और बचाव कार्य के लिए प्रशासन की ओर से 16 गांवों में 22 नाव और नौ स्टीमर लगाए गए हैं।
तहसील क्षेत्र में छह बाढ़ शरणालय बनाए गए हैं। इनमें शमसाबाद मंडी और कायमगंज मंडी में दो शरणालय संचालित हैं। एसडीएम कायमगंज के अनुसार शमसाबाद मंडी के शरणालय में 85 से 90 लोग, जबकि कायमगंज मंडी में करीब 35 लोग शरण लिए हुए हैं।
नाव मिली, नाविक नहीं मिला तो महिलाओं ने थामी पतवार
अमृतपुर तहसील के बाढ़ प्रभावित मंझा की मड़ैया में प्रशासन की ओर से नाव उपलब्ध कराई गई है, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार नाव चलाने के लिए नाविक उपलब्ध नहीं है। मजबूरी में महिलाएं और किशोरियां खुद नाव चलाकर बाढ़ के पानी के बीच आवागमन कर रही हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ के कारण गांवों के रास्ते पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं और नाव ही आने-जाने का एकमात्र सहारा बची है। तेज बहाव के बीच बिना प्रशिक्षित नाविक के नाव चलाना कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकता है। महिलाओं के खुद पतवार थामकर नाव चलाने की तस्वीरें बाढ़ के बीच प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर रही हैं।
गुलरिया बाली भावन में घरों तक पहुंचा पानी, बीमारी ने भी घेरा
उधर, गुलरिया बाली भावन गांव में रामगंगा का पानी करीब सात-आठ घरों तक पहुंच गया है। ग्रामीण शिवओम के अनुसार गांव में खांसी और बुखार समेत कई बीमारियों से लोग परेशान हैं। स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध न होने के कारण ग्रामीणों को बाढ़ के पानी से होकर निजी चिकित्सकों तक जाना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ के दौरान एक ओर आवागमन की समस्या बढ़ गई है तो दूसरी ओर बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है।
चार साल से अधूरा हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर
गांव में करीब चार वर्ष से निर्माणाधीन हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर भी बाढ़ के पानी की चपेट में है। ग्रामीणों के मुताबिक निर्माण कार्य अब तक पूरा नहीं हुआ है। जिस समय ग्रामीणों को स्वास्थ्य सुविधा की सबसे ज्यादा जरूरत है, उसी समय अधूरा पड़ा केंद्र किसी काम नहीं आ रहा है।
बाढ़ प्रभावित महिला शिवश्री ने आरोप लगाया कि हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर जिस जमीन पर बनाया गया है, वह उनकी निजी जमीन थी और जमीन के बदले उन्हें अब तक मुआवजा नहीं मिला है। उनका कहना है कि वर्षों बीतने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ।
निरीक्षण और राशन किट के निर्देश
कायमगंज तहसील क्षेत्र में नायब तहसीलदार मो. हसीन ने हुसैनपुर तराई में स्थलीय निरीक्षण किया। प्रभावित परिवारों को राशन किट का वितरण सुनिश्चित कराने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है। प्रशासन का कहना है कि बाढ़ प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
हालांकि अमृतपुर क्षेत्र में नाव संचालन और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर ग्रामीणों की शिकायतें प्रशासनिक दावों पर सवाल खड़े कर रही हैं। नाविक की व्यवस्था न होने से महिलाओं को खुद नाव चलानी पड़ रही है और स्वास्थ्य केंद्र अधूरा होने से मरीजों को बाढ़ के पानी से होकर इलाज के लिए जाना पड़ रहा है।
नाव संचालन और बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों की समस्याओं को लेकर एसडीएम अमृतपुर श्वेता साहू का पक्ष जानने के लिए कई बार फोन किया गया, लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ। ऐसे में गंगा-रामगंगा की बाढ़ के बीच ग्रामीणों के सामने आवागमन, सुरक्षित आश्रय, राशन और स्वास्थ्य सुविधाओं का संकट लगातार गहराता दिखाई दे रहा है।

