रिपोर्ट गोपाल सक्सेना |
फर्रुखाबाद।
कायमगंज/शमसाबाद। गंगा की बाढ़ ने समैचीपुर चितार गांव में ऐसा कहर बरपाया है कि ग्रामीणों के सामने अब अपना आशियाना बचाने से लेकर दो वक्त की रोटी और सुरक्षित जिंदगी तक का संकट खड़ा हो गया है। गंगा का कटान लगातार बढ़ता जा रहा है। रविवार को एक ही दिन में 15 पक्के मकान गंगा की तेज धार में समा गए, जबकि शनिवार को भी तीन पक्के मकान कटान की भेंट चढ़ चुके हैं। ग्रामीणों और लेखपाल के अनुसार 16 अगस्त से अब तक करीब 35 पक्के मकान और 25 झोपड़ियां कट चुकी हैं।
एक साथ इतनी बड़ी संख्या में पक्के मकानों के गंगा में समा जाने से गांव में दहशत का माहौल है। जिन लोगों ने वर्षों की मेहनत से अपना घर बनाया था, देखते ही देखते उनकी आंखों के सामने उनका आशियाना गंगा की तेज धार में समा गया। कई परिवार अब अपने घरों से बेघर होकर पड़ोसियों, परिचितों और रिश्तेदारों के यहां शरण लेने को मजबूर हैं।

एक दिन में उजड़ गए कई परिवार
गांव के प्रधान पुत्र सिजवान ने बताया कि रविवार को नौशाद, कुश मोहम्मद, ईदउल, हसीना बेगम, कमरुद्दीन, इरशाद, मोमीन, इकलाख, निन्तार, जुम्मन, गुलाम, कमरुद्दीन, दिलशाद और इबरान सहित अन्य ग्रामीणों के पक्के मकान गंगा में समा गए। इसके अलावा बदरुद्दीन, रईस और झरूआ की झोपड़ियां भी कटान की चपेट में आ गईं।
ग्रामीणों का कहना है कि मकान कटने का दर्द वही परिवार समझ सकता है, जिसने अपनी आंखों के सामने अपना घर उजड़ते देखा हो। बाढ़ और कटान ने न सिर्फ उनके सिर से छत छीन ली है, बल्कि गृहस्थी का सामान, अनाज और रोजमर्रा की जरूरतों को लेकर भी संकट खड़ा कर दिया है।
राशन खत्म, ईंधन भी नहीं बचा
प्रधान पुत्र सिजवान ने बताया कि करीब एक माह पहले प्रशासन की ओर से गांव में 414 पैकेट राशन सामग्री उपलब्ध कराई गई थी। ग्रामीणों के अनुसार यह राशन मुश्किल से एक सप्ताह चल सका। इसके बाद से पर्याप्त राहत सामग्री नहीं पहुंची है।
बाढ़ के कारण गांव चारों ओर से पानी से घिरा हुआ है। ग्रामीणों के पास खाना पकाने के लिए गैस सिलेंडर की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। ऐसे में लकड़ी के सहारे भोजन पकाना पड़ रहा है, लेकिन लगातार बारिश के कारण लकड़ियां और अन्य ईंधन भी गीले हो चुके हैं। इससे प्रभावित परिवारों के सामने भोजन पकाने तक की समस्या खड़ी हो गई है।
गर्भवती महिलाओं और बच्चों को लेकर चिंता
ग्रामीणों ने बताया कि गांव में कुछ गर्भवती महिलाएं भी हैं। चारों तरफ पानी भरा होने के कारण उन्हें समय पर स्वास्थ्य सुविधा मिलना मुश्किल है। करीब 15 दिन पहले गांव में स्वास्थ्य शिविर लगाकर दवाइयां वितरित की गई थीं, लेकिन उसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम के दोबारा नहीं पहुंचने से ग्रामीण चिंतित हैं।
बाढ़ के बीच बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। घरों के कटने और चारों ओर पानी भरने के कारण परिवारों के सामने बच्चों को सुरक्षित रखने की चुनौती भी बनी हुई है।
जिलाधिकारी ने कहा- तत्काल उपलब्ध कराई जाएगी राहत
जिलाधिकारी अंकुर लाठर ने कहा कि पूर्व में जिन लोगों के मकान कटे थे, उन्हें भूमि पट्टा और धनराशि उपलब्ध कराई जा चुकी है। रविवार को 24 घंटे के भीतर 15 घर कटने की सूचना प्राप्त हुई है। इन प्रभावित लोगों के लिए भी धनराशि, भूमि पट्टा और राहत सामग्री तत्काल उपलब्ध कराई जाएगी। अभी तक किसी भी प्रकार की जनहानि होने की सूचना नहीं मिली है।
उन्होंने कहा कि गांव में तत्काल प्रभाव से दोबारा राहत सामग्री और मेडिकल कैंप की टीम भेजकर लोगों को राहत दिलाई जाएगी। जिला प्रशासन हर स्थिति में बाढ़ पीड़ितों के साथ खड़ा है।
बाढ़ शरणालय है, लेकिन गांव छोड़ना नहीं चाहते ग्रामीण
प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए शरणालय की व्यवस्था की गई है। शमसाबाद मंडी में बाढ़ शरणालय बनाया गया है। एसडीएम कायमगंज अभिषेक वर्मा के अनुसार शरणालय में कंबल, पंखा, लाइट और भोजन की व्यवस्था की गई है। बच्चों की पढ़ाई की भी व्यवस्था की गई है तथा शरणालय का प्रतिदिन निरीक्षण किया जाता है।
हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि वे अपना गांव और बचा हुआ घर छोड़कर शरणालय में नहीं जाना चाहते। जिन लोगों के मकान कट चुके हैं, वे अपने पड़ोसियों, परिचितों या रिश्तेदारों के यहां रहकर किसी तरह समय काट रहे हैं।
प्रशासन ने कहा- आकलन के बाद मिलेगी राहत
उप जिलाधिकारी कायमगंज अभिषेक वर्मा ने कहा, “पहले जिन घरों के गंगा की कटान की जद में आने से नुकसान हुआ था, उनका आकलन कर राहत मुहैया कराई जा चुकी है। वर्तमान में जो मकान कटान की जद में आ रहे हैं अथवा जिनके संबंध में जानकारी प्राप्त हो रही है, उनका भी आकलन कर प्रभावित लोगों को नियमानुसार उचित राहत उपलब्ध कराई जाएगी। बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए शरणालय की व्यवस्था की गई है। शमसाबाद मंडी में बाढ़ शरणालय बनाया गया है, जहां कंबल, पंखा, लाइट और भोजन की व्यवस्था के साथ बच्चों की पढ़ाई की भी व्यवस्था की गई है। शरणालय का प्रतिदिन निरीक्षण किया जाता है।”
सिंचाई विभाग को 15 मकानों की जानकारी नहीं
सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता दुर्ण कुमार ने कहा, “रविवार को 15 घर और तीन झोपड़ियों के कटने की जानकारी अभी नहीं है। फिर भी घरों के कटान को रोकने के लिए समुचित व्यवस्था करने का प्रयास करेंगे।”
वहीं लेखपाल पंकज चौहान ने बताया कि रविवार को 15 पक्के मकान और शनिवार को तीन पक्के मकान कटान की चपेट में आए। उनके अनुसार अब तक करीब 35 पक्के मकान और 25 झोपड़ियां कट चुकी हैं। उन्होंने बताया कि गांव के अधिकांश लोग दूसरे लोगों के यहां अथवा रिश्तेदारियों में रुके हुए हैं और बाढ़ शरणालय में जाने के लिए तैयार नहीं हैं।
ग्रामीणों की मांग- तत्काल पहुंचे राहत
गंगा के लगातार बढ़ते कटान ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। प्रभावित परिवारों का कहना है कि प्रशासन की ओर से शरणालय की व्यवस्था अपनी जगह है, लेकिन जिनके घर और गृहस्थी उजड़ चुकी है, उन्हें तत्काल राशन, भोजन, पीने का पानी, ईंधन, चिकित्सा सुविधा और आर्थिक सहायता की जरूरत है।
ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि कटान प्रभावित परिवारों का तत्काल सर्वे कराकर राहत उपलब्ध कराई जाए और गंगा के कटान को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं, ताकि बचे हुए मकानों को भी गंगा की धारा में समाने से बचाया जा सके।

