राजेपुर/फर्रुखाबाद।
पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आने से कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हैरानी की बात यह है कि पुलिस ने बिना जांच किए एक ऐसे व्यक्ति को भी आरोपी बना दिया, जिसकी मौत करीब 10 साल पहले ही हो चुकी थी।
मामला 13 मार्च की शाम का है, जब अनुज पुत्र राजकुमार निवासी गांधी (थाना राजेपुर क्षेत्र) ने मारपीट, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी का आरोप लगाते हुए थाना राजेपुर में तहरीर दी। तहरीर में राममूर्ति, विजय, अभिषेक और विनोद निवासी गांधी को नामजद आरोपी बनाया गया।
पुलिस ने तहरीर के आधार पर तुरंत मुकदमा दर्ज कर लिया, लेकिन जांच का अभाव तब उजागर हुआ जब आरोपियों में शामिल विनोद का नाम सामने आया, जिसकी मृत्यु वर्ष 2016 में ही हो चुकी है। इसके बावजूद पुलिस ने मृतक को भी आरोपी बनाकर एफआईआर दर्ज कर दी।
इस खुलासे के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर प्राथमिक जांच की जाती, तो इतनी बड़ी गलती सामने नहीं आती। यह घटना दिखाती है कि किस तरह बिना सत्यापन के मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं।
वहीं, मृतक विनोद के परिजनों ने पूरे मामले को साजिश करार दिया है। उनका आरोप है कि पैसे के लेन-देन के चलते फर्जी मुकदमा दर्ज कराया गया है और परिवार के अन्य सदस्यों को जानबूझकर फंसाया जा रहा है। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है।
कानूनी जानकारों का कहना है कि किसी मृत व्यक्ति को आरोपी बनाना न केवल गंभीर लापरवाही है, बल्कि यह न्याय प्रक्रिया का दुरुपयोग भी माना जा सकता है। ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई भी संभव है।
थाना प्रभारी का कहना है कि मुकदमा शिकायतकर्ता की तहरीर के आधार पर दर्ज किया गया है और जांच के दौरान सच्चाई सामने आ जाएगी। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस की कार्यशैली पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
