सरकारी जमीन पर 'भूमाफिया मॉडल'! भूमाफिया कर रहे नील कोठी एवं शीतला माता मन्दिर की भूमि पर कथित कब्जे की साजिश

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सरकारी जमीन पर ‘भूमाफिया मॉडल’! भूमाफिया कर रहे नील कोठी एवं शीतला माता मन्दिर की भूमि पर कथित कब्जे की साजिश

राजस्व सीमांकन उखाड़कर अवैध प्लाटिंग का खेल—क्या माफियाओं के आगे प्रशासन बेबस

जलेसर (एटा)। तहसील जलेसर के राजस्व ग्राम इसौली में सरकारी भूमि को लेकर उठे गंभीर आरोपों ने राजस्व प्रशासन की कार्यप्रणाली और सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए, नील कोठी स्थित शीतला माता मंदिर से जुड़ी सरकारी भूमि — गाटा संख्या 1215 और 1216 — के पूर्व में किए गए आधिकारिक चिन्हांकन को कथित तौर पर हटा दिया गया। स्थानीय लोगों का आरोप है, कि गाटा संख्या 1217 पर प्लाटिंग करने वाले भूमाफियाओं द्वारा अवैध रूप से चिन्हांकन हटाकर सरकारी गाटा संख्या 1215 से रास्ता दिखा कर संभावित खरीदारों को गुमराह किया जा रहा है, जो स्पष्ट रूप से नियमों का उल्लंघन है। ग्रामीणों के अनुसार 29 जून 2026 को राजस्व विभाग की टीम ने गाटा संख्या 1215 एवं 1216 की विधिवत पैमाइश कर सीमांकन कराया था। लेखपाल, कानूनगो और ग्राम प्रधान की उपस्थिति में सरकारी सीमा चिन्ह स्थापित किए गए थे। लेकिन आरोप है कि महज़ तीन दिन बाद, 2 जुलाई को हाल ही में नील कोठी भूमि के किनारे स्थित चिन्हों और सीमांकन संकेतों को भूमाफियाओं द्वारा हटाया गया है।

उद्राण खतौनी के अनुसार गाटा संख्या 1215, 1216 सरकारी खाते में दर्ज बताई जा रही है। ऐसे में यदि सरकारी भूमि पर अवैध प्लाटिंग या अतिक्रमण के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह सरकारी संपत्ति की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न है। ग्रामीणों का कहना है, कि जिस भूमि पर धार्मिक आयोजन होते हैं, उसी भूमि पर कब्जे के प्रयास स्थानीय लोगों की धार्मिक भावनाओं को भी आहत करते हैं। आरोप है कि सीमांकन के पत्थर हटाकर और मिट्टी के टीले बनाकर सरकारी भूमि की वास्तविक सीमा धुंधली करने की कोशिश की गई, ताकि बाद में कब्जे का विवाद खड़ा किया जा सके। किसी भी कार्यवाही से पहले प्रशासनिक सत्यापन आवश्यक है। इस संबंध में ग्रामीणों ने पंचायत कार्यालय और संबंधित राजस्व अधिकारियों से टिप्पणी मांगने की कोशिश की, परन्तु अभी उनकी ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है। सबसे बड़ा सवाल यह है, कि यदि राजस्व विभाग ने सीमांकन कराया था, तो सरकारी चिन्ह आखिर किसके संरक्षण में थे? यदि उन्हें वास्तव में क्षतिग्रस्त किया गया, तो अब तक जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध क्या कार्यवाही हुई? क्या सरकारी भूमि की सुरक्षा केवल कागज़ों तक सीमित है, या जमीन पर भी उसका अस्तित्व बचाया जाएगा? सरकारी नील कोठी के शीतला माता मंदिर और मेले की भूमि की रक्षा के लिए प्रबल और स्पष्ट कदम उठाए जाएं, जिसमें बाउंड्री वॉल बनवाना, स्वीकृत सीमांकन चिन्ह (स्टोन/पिलर) पुनर्स्थापित करना और नियमित निगरानी शामिल हों। ग्रामीणों का कहना है, कि यदि प्रशासन समय पर कदम नहीं उठाता है और भविष्य में सरकारी भूमि पर अवैध रास्ता दर्शाया गया तो समस्त जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की होगी क्योंकि यह मामला सभी के संज्ञान में है।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है, कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, सरकारी भूमि का पुनः स्थायी सीमांकन कराया जाए, चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं, कथित अवैध प्लाटिंग पर तत्काल रोक लगे तथा यदि जांच में आरोप सत्य पाए जाएं तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्यवाही की जाए।

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