तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा उलटफेर: विजय की सरकार बनाने की राह में रोड़ा
चेन्नई: शुक्रवार शाम तमिलनाडु की राजनीति में अचानक बड़ा मोड़ देखने को मिला। अभिनेता से नेता बने जोसेफ विजय की पार्टी टीवीके के लिए सरकार बनाने का सपना उस समय ठंडा पड़ गया, जब उनका बहुमत अधूरा साबित हुआ।
दिनभर ऐसा लग रहा था कि टीवीके ने 118 सीटों के बहुमत को पार कर लिया है। कांग्रेस, सीपीआई, सीपीआई(एम) के समर्थन के साथ वीसीके और आईयूएमएल के भी शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही थी। इसी विश्वास में विजय के पनैयूर स्थित घर के बाहर पार्टी समर्थकों ने पटाखे जलाए और शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियों की चर्चा शुरू कर दी।
लेकिन शाम तक राजनीतिक गणित बदल गया। वीसीके प्रमुख थोल. थिरुमावलवन ने संकेत दिया था कि उनकी पार्टी वाम दलों के निर्णय के अनुसार टीवीके का समर्थन करेगी, लेकिन देर रात तक उन्होंने राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर को कोई औपचारिक समर्थन पत्र नहीं सौंपा। राज्यपाल कार्यालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार शाम तक विजय के पास केवल 116 विधायकों का आधिकारिक समर्थन दर्ज था, जो बहुमत से कम था।
इस देरी ने राजनीतिक माहौल में नई अटकलें बढ़ा दी। थिरुमावलवन ने टीवीके, एआईएडीएमके के ई. पलानीस्वामी और डीएमके नेताओं से लगातार बैठकें कीं। उन्होंने मीडिया से कहा था कि वीसीके वाम दलों के साथ रहेगा, लेकिन अंतिम निर्णय देर शाम तक सार्वजनिक नहीं हुआ। वहीं, मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के आवास पर रात 10 बजे तक बातचीत चली, जिसमें थिरुमावलवन को मुख्यमंत्री पद के साझा उम्मीदवार बनाने जैसी संभावनाओं पर चर्चा हुई।
इसी बीच एएमएमके प्रमुख टीटीवी दिनाकरन ने राज्यपाल से मिलने के बाद आरोप लगाया कि टीवीके द्वारा “हार्स ट्रेडिंग” की जा रही है और उनका एकमात्र विधायक लापता है। दिनाकरन के अनुसार, उनका विधायक फोन नहीं उठा रहा और हो सकता है कि उसे हिरासत में लिया गया हो। इस मामले की जांच के आदेश राज्यपाल ने डीजीपी को दिए। इसके कारण शनिवार को प्रस्तावित शपथ ग्रहण समारोह भी रोक दिया गया।
इस प्रकार, जो दिनभर टीवीके के पक्ष में लगता था, वह शाम तक अनिश्चितता और राजनीतिक टकराव में बदल गया। तमिलनाडु में सत्ता गठन का मामला फिलहाल अधर में लटका हुआ है।
