राष्ट्रीय काव्य गोष्ठी में याद किया गया बहुजन महापुरुषों का योगदान
अलीगढ़। सम्यक संस्कृति साहित्य संघ के बैनर तले ऑनलाइन राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का आयोजन गूगल मीट के माध्यम से किया गया। कार्यक्रम का विषय “बहुजन महापुरुषों का देश के विकास में योगदान” रहा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. संतोष पटेल (सहायक रजिस्ट्रार, दिल्ली तकनीकी विश्वविद्यालय, नई दिल्ली) ने की तथा संचालन आर. एस. आघात ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ अप्रैल माह में जन्मे महान बहुजन महापुरुष डॉ. भीमराव अंबेडकर और राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले को स्मरण करते हुए किया गया। कार्यक्रम में देश के विभिन्न शहरों से कवियों ने अपनी रचनाओं की प्रस्तुति दी। लखनऊ से डॉ. अवंतिका सिंह ने समाज की वर्तमान परिस्थितियों को उजागर करती हुई अपनी चार रचनाएँ— “लिखना जरूरी है”, “हाशिए का आदमी”, “योमे आजादी” तथा “मजदूरों का संगीत” प्रस्तुत कीं। अलीगढ़ से एन. प्रीति बौद्ध ने “जल आंदोलन” सहित तीन रचनाओं का पाठ किया। हापुड़ से डॉ. जितेंद्र कुमार जीत ने अपनी रचना के माध्यम से बाबा साहेब के जीवन को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा। रामपुर से अमित रामपुरी ने “रमा गर तुम नहीं होती” कविता के माध्यम से बाबा साहेब और माता रमाबाई को भावपूर्ण नमन किया। मेरठ से गुलाब सिंह ने अपनी सुरमयी आवाज में “बाबा साहेब के सपनों का देश बनाने आए हैं” तथा “पुष्प उनके लिए बिछा जो गए” प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। अलीगढ़ से बनवारी लाल विकल ने “आओ चलें बनायें भारत बाबा के ख्यालों से” गीत प्रस्तुत कर खूब तालियाँ बटोरीं। संघ के संरक्षक डॉ. पूरन सिंह ने अपनी संक्षिप्त किन्तु प्रभावशाली रचनाएँ “भूख” और “जीत हमारी होगी” प्रस्तुत कर कार्यक्रम में विशेष उत्साह भर दिया। कार्यक्रम में अंतिम प्रस्तुति मंच संचालक आर एस आघात ने अपनी कविता- भीमराव जी गए हैं लंदन गौलमेज़ सम्मेलन में को प्रस्तुत किया जिसकी सभी ने प्रशंसा करते हुए उन्हें बधाई दी । कार्यक्रम में अन्य प्रतिभागियों में डॉ. अनिता भारती, राहुल कुमार, अभी, प्रियंका साहनी, सईदा सैयरा, अभिषेक कुमार, नौशाद अली, मुन्नी लाल तथा अंजली आदि उपस्थित रहे।
अध्यक्षीय भाषण में डॉ. संतोष पटेल ने कहा कि यह मंच उत्कृष्ट कार्यक्रमों का आयोजन कर रहा है और सभी की सक्रिय भागीदारी सराहनीय है। उन्होंने सुझाव दिया कि भविष्य में इन कार्यक्रमों में विचार-विमर्श एवं पुस्तक परिचर्चा को भी शामिल किया जाए, जिससे मंच और अधिक समृद्ध हो सके।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. जितेंद्र कुमार जीत ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संघ भविष्य में और भी बेहतर कार्यक्रम आयोजित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
