मुख्य चुनाव आयुक्त की कार्यप्रणाली के खिलाफ इंडिया गठबंधन का जोरदार प्रदर्शन और पुतला दहन
मैनपुरी (अजय किशोर) गुरुवार को इंडिया गठबंधन के बैनर तले विभिन्न दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ जोरदार आक्रोश व्यक्त करते हुए शहर में एक बड़ा प्रदर्शन किया। समाजवादी पार्टी के जिला कार्यालय से शुरू हुआ यह पैदल मार्च शहर के प्रमुख मार्गों से होता हुआ जेल चौराहे और कलेक्ट्रेट पहुंचा, जहां प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निष्पक्ष रूप से काम न करने का गंभीर आरोप लगाया। इस दौरान आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने जेल चौराहे पर मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला भी फूंका और निर्वाचन आयोग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
इस विरोध प्रदर्शन में गठबंधन के कई प्रमुख दिग्गज नेता सक्रिय रूप से शामिल हुए, जिनमें पूर्व विधायक राजकुमार यादव, कांग्रेस जिला अध्यक्ष गोपाल कुलश्रेष्ठ और किशनी विधायक बृजेश कठेरिया सहित अन्य कई गणमान्य नेता एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे। नेताओं ने हालिया एफआईआर और मतदाता सूची से जुड़े विवादास्पद फैसलों को आड़े हाथों लेते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त को उनके पद से हटाने या तत्काल इस्तीफा देने की पुरजोर मांग उठाई। उनका कहना था कि निर्वाचन आयोग जैसी संवैधानिक संस्था को पूरी तरह निष्पक्ष रहकर काम करना चाहिए, लेकिन मौजूदा समय में इसकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सपा जिलाध्यक्ष आलोक शाक्य और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने बताया कि शीर्ष नेतृत्व के आह्वान पर पूरे देश में यह विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है, क्योंकि हाल ही में दर्ज मुकदमे और चुनावी प्रक्रियाएं पूरी तरह से अनुचित प्रतीत होती हैं। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया बेहद पारदर्शी होनी चाहिए, जिससे किसी भी पात्र और योग्य मतदाता को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। सुप्रीम कोर्ट की पूर्व टिप्पणियों का हवाला देते हुए नेताओं ने दावा किया कि अदालत ने फॉर्म-6 को लेकर ऐसा कोई निर्देश नहीं दिया था, जिससे नए मतदाताओं के नाम जुड़वाने में रुकावट आए, बल्कि बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं।
अंत में गठबंधन के नेताओं ने कड़े शब्दों में मांग की कि लगभग 18 करोड़ से अधिक वोट काटे जाने के मामलों और हालिया विवादास्पद चुनावी प्रक्रियाओं को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए। साथ ही यह भी मांग की गई कि 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके युवाओं के नाम पहले की तरह बीएलओ के माध्यम से फॉर्म-6 भरवाकर मतदाता सूची में जोड़े जाएं ताकि लोकतंत्र की गरिमा और निष्पक्षता पूरी तरह से बरकरार रह सके।

