वेतनमान में विसंगति को लेकर श्री चित्रगुप्त महाविद्यालय के शिक्षकों का हल्लाबोल
मैनपुरी (अजय किशोर)। स्थानीय श्री चित्रगुप्त महाविद्यालय में शिक्षकों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर प्रशासन के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है। पदोन्नत वेतनमान का लाभ न मिलने से क्षुब्ध शिक्षकों ने महाविद्यालय परिसर में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन कर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। 10 अप्रैल को दोपहर 12 बजे से शुरू हुए इस प्रदर्शन में न केवल कॉलेज के शिक्षक, बल्कि जिले के अन्य सहायता प्राप्त महाविद्यालयों के प्राध्यापक भी एकजुटता दिखाने पहुंचे। शिक्षकों का कहना है कि शासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद उन्हें उनके वाजिब हक से वंचित रखा जा रहा है।
यह विवाद मुख्य रूप से 14 शिक्षकों के पदोन्नत वेतनमान से जुड़ा है, जिसके लिए प्रयागराज स्थित उच्च शिक्षा निदेशालय पहले ही आदेश जारी कर चुका है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि निदेशालय के सख्त रुख और निर्देश की अवहेलना करने पर प्राचार्य का वेतन रोकने तक की चेतावनी दी गई थी, फिर भी कॉलेज प्रबंधन टस से मस नहीं हुआ। इस प्रशासनिक उदासीनता के कारण शिक्षकों में भारी रोष है, क्योंकि वे लंबे समय से व्यक्तिगत और लिखित रूप में अपनी मांगें दोहरा रहे हैं, जिन्हें लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।
वेतन विसंगति के अलावा शिक्षकों ने स्थायीकरण (कन्फर्मेशन लेटर) जैसे बुनियादी अधिकारों के हनन का भी मुद्दा उठाया। आंदोलनकारियों के अनुसार, जो प्रक्रिया एक वर्ष में पूरी होनी चाहिए थी, वह चार साल बीत जाने के बाद भी अधूरी है। इसी क्रम में काली पट्टी बांधकर अपना विरोध जताते हुए शिक्षकों ने इसे मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न के खिलाफ एक सत्याग्रह करार दिया। उनका कहना है कि पूर्व में किए गए मौन प्रदर्शन का कोई परिणाम न निकलने के कारण अब उन्हें इस कड़े आंदोलन का रास्ता चुनना पड़ा है।
शिक्षक संघ ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान करते हुए महाविद्यालय प्रशासन को अंतिम चेतावनी दी है। संघ का स्पष्ट कहना है कि यदि मार्च 2026 के वेतन में पदोन्नत वेतनमान लागू नहीं किया गया, तो इस आंदोलन को और अधिक तीव्र और व्यापक बनाया जाएगा। शहर कोतवाली क्षेत्र स्थित पुरानी बिल्डिंग में आयोजित इस प्रदर्शन के माध्यम से शिक्षकों ने यह साफ कर दिया है कि भविष्य में होने वाली किसी भी अशांति की पूरी जिम्मेदारी कॉलेज प्रबंधन की होगी।
