फर्रुखाबाद|
विकास खंड राजेपुर के पूर्व माध्यमिक संविलियन विद्यालय कुम्हरौर में बुधवार को खंड शिक्षा अधिकारियों की टीम ने निरीक्षण कर विभिन्न अनियमितताओं की जांच की। यह जांच बेसिक शिक्षा अधिकारी के निर्देश पर कराई गई, जिसमें प्रधानाचार्य आशीष पर कोविड काल के दौरान धन निकासी और छात्रों की उपस्थिति अधिक दर्शाने के आरोपों की पड़ताल की गई।
खंड शिक्षा अधिकारी नवाबगंज अमर सिंह राणा एवं शमशाबाद के बीरेंद्र सिंह पटेल
शिकायत कर्ता
गजेंद्र सिंह पुत्र राजेंद्र सिंह, मृदुल कुमार, प्रिया रानी की शिकायत पर सुबह विद्यालय पहुंचे और ग्रामीणों व शिक्षकों की मौजूदगी में अभिलेखों की गहन जांच की। अधिकारियों ने बताया कि कोविड अवधि में खर्च किए गए धन और विद्यार्थियों की उपस्थिति को लेकर शिकायत मिली थी, जिसकी जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट शीघ्र ही बेसिक शिक्षा अधिकारी को सौंपी जाएगी।
निरीक्षण के दौरान विद्यालय की स्थिति पर अधिकारियों ने गहरी चिंता जताई। उन्होंने पाया कि कम्पोजिट ग्रांट मिलने के बावजूद विद्यालय में समुचित विकास कार्य नहीं कराए गए। यहां तक कि ग्रीन बोर्ड भी व्यवस्थित नहीं मिले।
सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि जर्जर भवन में आंगनबाड़ी केंद्र के बच्चों को बैठाया जा रहा है, जो किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकता है। इस संबंध में आंगनबाड़ी कार्यकत्री रामबेटी और सहायिका हंसमुखी ने बताया कि केंद्र भवन तो बना है, लेकिन उसमें खिड़की-दरवाजे नहीं लगे हैं, जिससे मजबूरन बच्चों को विद्यालय में बैठाना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि केंद्र पर 60 बच्चे पंजीकृत हैं, जिनमें से 30 बच्चे बुधवार को उपस्थित रहे।
विद्यालय परिसर में करीब चार जर्जर भवन लंबे समय से खड़े हैं, जिन पर ‘जर्जर’ लिखा होने के बावजूद विभाग द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इन भवनों के आसपास गंदगी और झाड़ियों का अंबार लगा है, जिससे बच्चों के बीमार होने का खतरा भी बना हुआ है।
नीलामी प्रक्रिया को लेकर भी लापरवाही सामने आई है। बताया गया कि भवनों की वास्तविक कीमत से अधिक, लगभग 6 लाख रुपये की नीलामी राशि निर्धारित कर दी गई, जिसके चलते अब तक कोई भी भवन नीलाम नहीं हो सका। यही कारण है कि यह विद्यालय विकास खंड के सबसे बदहाल स्कूलों में गिना जा रहा है।
अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि जांच के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी और विद्यालय की स्थिति सुधारने के लिए उचित कदम उठाए।
