● बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा देने वाले समाज में बेटियों पर अभद्र टिप्पणी शर्मनाक: मानवाधिकार सुरक्षा संगठन
फर्रुखाबाद।
देश की राजनीति चाहे कितनी भी गरमा जाए, लेकिन राजनीतिक विरोध में बेटियों और परिवार को हथियार बनाना किसी भी सभ्य समाज के लिए शर्मनाक और निंदनीय है। राजनीति की लड़ाई हमेशा मुद्दों पर होनी चाहिए, उसमें बेटियों को घसीटना भारतीय संस्कृति का खुला अपमान है।
यह बात मानवाधिकार सुरक्षा संगठन के जिलाध्यक्ष गौरव यादव (टिंकल भइया) ने मीडिया को जारी एक बयान में कही। हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कुछ बयानों और अमर्यादित टिप्पणियों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि इन घटनाओं ने समाज के संस्कारों पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। राजनीतिक विरोध के नाम पर जिस तरह बेटियों और परिवारों को निशाना बनाया जा रहा है, उससे हर जागरूक नागरिक आहत है।
बेटियां किसी एक पार्टी की नहीं, देश की शान हैं
जिला अध्यक्ष गौरव यादव ने कहा कि बेटियां किसी एक नेता, पार्टी या परिवार की नहीं होतीं, बल्कि वे पूरे देश और समाज की शान होती हैं। हमारे संस्कारों और सनातन परंपरा में बेटी को मां दुर्गा का स्वरूप माना गया है। ऐसे पूजनीय स्थान पर बैठी बेटियों पर अभद्र टिप्पणी करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन किसी भी परिस्थिति में मर्यादा और संस्कार नहीं टूटने चाहिए।
अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर घटियापन मंजूर नहीं
‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ के संकल्प को दोहराते हुए टिंकल भइया ने कहा कि जो लोग बेटियों के सम्मान पर हमला कर रहे हैं, उन्हें समाज कभी माफ नहीं करेगा। अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर किसी की बेटी, बहन या परिवार को अपमानित करना लोकतंत्र नहीं, बल्कि घटिया मानसिकता का परिचय है।
हम किसी दल के नहीं, बेटियों के सम्मान के प्रहरी हैं
गौरव यादव ने सभी राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और सजग नागरिकों से अपील की है कि वे एकजुट होकर बेटियों की गरिमा की रक्षा करें। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “यदि बेटियों की इज्जत पर उंगली उठाई गई, तो समाज का हर जिम्मेदार व्यक्ति अपनी आवाज बुलंद करेगा। हम किसी राजनीतिक दल का समर्थन नहीं कर रहे, बल्कि बेटियों के सम्मान के प्रहरी हैं। बेटी की गरिमा पर चोट करने वालों को समाज अच्छी तरह से आईना दिखाना जानता है।”
