शमशाबाद/फर्रुखाबाद।
धार्मिक आस्था के साथ गंगा में कलश विसर्जन के लिए निकले श्रद्धालुओं की यात्रा उस समय चीख-पुकार में बदल गई, जब शमशाबाद थाना क्षेत्र में बूढ़ी गंगा के पास ढाई घाट मार्ग पर श्रद्धालुओं से भरी एक ट्रैक्टर-ट्रॉली अनियंत्रित होकर पलट गई। हादसे में महिलाओं, पुरुषों और बच्चों समेत 15 लोग घायल हो गए। बताया गया कि दुर्घटना के समय ट्रैक्टर-ट्रॉली पर करीब 35 से 40 लोग सवार थे। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शमशाबाद पहुंचाया गया, जहां दो बच्चों को प्राथमिक उपचार के बाद लोहिया अस्पताल रेफर कर दिया गया।
इस घटना ने एक बार फिर धार्मिक आयोजनों में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से होने वाली सामूहिक यात्राओं की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह भी है कि आखिर श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ऐसे वाहनों में सवारियों की संख्या, यात्रा के दौरान सावधानी और जोखिम भरे मार्गों पर सुरक्षा के इंतजामों को लेकर कितनी सतर्कता बरती जा रही है।
भागवत कथा के समापन के बाद कलश विसर्जन के लिए निकले थे ग्रामीण
जानकारी के मुताबिक, एटा जिले के अलीगंज कोतवाली क्षेत्र के फरसोली गांव में 11 अक्टूबर से ग्रामीणों के सहयोग से नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया गया था। 19 अक्टूबर को कथा का समापन हुआ, जबकि 20 अक्टूबर को गांव में भंडारे का आयोजन किया गया। इसके बाद बुधवार को ग्रामीण गंगा में कलश विसर्जन करने के लिए फर्रुखाबाद के शमशाबाद थाना क्षेत्र स्थित ढाई घाट जाने के लिए तीन ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में सवार होकर निकले थे।
श्रद्धालुओं का जत्था अपने धार्मिक कार्यक्रम को पूरा करने के लिए आगे बढ़ रहा था। इसी दौरान बूढ़ी गंगा के पास ढलान पर एक ट्रैक्टर चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका। ट्रैक्टर सड़क से नीचे उतरकर किनारे लगे खंभे से टकरा गया। टक्कर के बाद पीछे लगी ट्रॉली पलट गई और उसमें सवार लोग उसके नीचे तथा आसपास गिरकर घायल हो गए।
अचानक हुए हादसे के बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई। महिलाएं और बच्चे दर्द से कराहने लगे। स्थानीय लोगों ने तत्काल राहत पहुंचाने की कोशिश की और पुलिस को सूचना दी।
15 घायलों में कई बच्चे शामिल, दो को किया गया रेफर
हादसे में घायल होने वालों में 10 वर्षीय चंदू, 12 वर्षीय गोपाल मिश्रा, 12 वर्षीय सुमित, 11 वर्षीय आकांक्षा, 18 वर्षीय गुंजन, 17 वर्षीय डाली, 30 वर्षीय सत्यभान, 13 वर्षीय मोहिनी, 35 वर्षीय खुशबू, 23 वर्षीय करीना, 10 वर्षीय सुमित, 40 वर्षीय गंगा देवी, 9 वर्षीय शिवकुमार, 10 वर्षीय आशिक और 17 वर्षीय नेहा शामिल हैं।
दुर्घटना में किसी के हाथ, किसी के सिर तो किसी के पैर में चोट आई। घायलों में बच्चों की संख्या भी काफी रही, जिससे हादसे की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
सूचना मिलते ही शमशाबाद थाना अध्यक्ष सचिन चौधरी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने स्थानीय लोगों और राहगीरों की मदद से सभी घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शमशाबाद पहुंचवाया। एक साथ कई घायलों के अस्पताल पहुंचने से कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया, लेकिन चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों ने उपचार शुरू कर दिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 13 घायलों को हल्की चोटें आईं, जबकि दो बच्चों को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए लोहिया अस्पताल रेफर किया गया। पुलिस के मुताबिक, किसी भी घायल को गंभीर चोट नहीं आई है।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया, अचानक पलट गई ट्रॉली
गांव निवासी सरिता ने बताया कि ग्रामीण गंगा में कलश विसर्जन के लिए जा रहे थे। ट्रैक्टर-ट्रॉली पर बड़ी संख्या में लोग सवार थे। रास्ते में अचानक ट्रॉली पलट गई, जिससे कई लोग घायल हो गए।
वहीं, हरपाल ने बताया कि गांव में नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया गया था। कथा के समापन और भंडारे के बाद ग्रामीण कलश विसर्जन के लिए निकले थे। इसी दौरान रास्ते में दुर्घटना हो गई।
घायल करीना के मुताबिक, ग्रामीण तीन ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में यात्रा कर रहे थे। इनमें से एक ट्रैक्टर की ट्रॉली पलटने से श्रद्धालु घायल हो गए।
पुलिस ने क्या कहा?
शमशाबाद थाना अध्यक्ष सचिन चौधरी ने बताया कि ढलान पर ट्रैक्टर अनियंत्रित होकर सड़क किनारे लगे खंभे से टकरा गया। इसके बाद ट्रैक्टर सड़क से नीचे उतर गया और पीछे लगी ट्रॉली पलट गई। हादसे में घायल लोगों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। दो बच्चों को लोहिया अस्पताल रेफर किया गया, जबकि अन्य घायलों का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उपचार कराया गया। पुलिस के अनुसार, किसी भी घायल को गंभीर चोट नहीं आई है।
प्रशासन के लिए भी है सतर्कता बरतने का संदेश
यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सामूहिक धार्मिक यात्राओं में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्क होने की जरूरत भी दर्शाता है। ट्रैक्टर-ट्रॉली का इस्तेमाल अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को धार्मिक आयोजनों और अन्य सामूहिक कार्यक्रमों में ले जाने के लिए किया जाता है। लेकिन क्षमता से अधिक लोगों को बैठाना, ढलान वाले रास्तों पर लापरवाही और सुरक्षा संबंधी सावधानियों की अनदेखी गंभीर दुर्घटनाओं का कारण बन सकती है।
ऐसे में संबंधित अधिकारियों के लिए जरूरी है कि धार्मिक आयोजनों और सामूहिक यात्राओं के दौरान लोगों को सुरक्षित परिवहन के प्रति जागरूक किया जाए। साथ ही, जोखिम वाले मार्गों पर यातायात सुरक्षा और आवश्यक सावधानियों को लेकर प्रभावी निगरानी सुनिश्चित की जाए, ताकि आस्था के नाम पर निकली यात्राएं हादसों का शिकार न बनें।
