बुराई के प्रतीक रावण का अंत, जय श्रीराम के जयघोष से गूंजा फर्रुखाबाद, धूमधाम से हुआ रावण दहन |

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Manoj Jauhri
Manoj Jauhri ब्यूरो चीफ (फर्रुखाबाद) - एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो राजनीति, अपराध, शिक्षा, मनोरंजन और स्थानीय समाचारों पर पोस्ट करते हैं। वे तथ्यों पर आधारित...
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फर्रुखाबाद/

असत्य पर सत्य, अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक विजयादशमी पर्व फर्रुखाबाद में उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। शहर के क्रिश्चियन कॉलेज ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम के दौरान रावण के पुतले का दहन किया गया। इस अवसर पर पूरा परिसर उत्सवी माहौल में नजर आया। रावण दहन के साथ ही लोगों को भगवान श्रीराम के आदर्शों पर चलने और समाज से बुराइयों को दूर करने का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम में जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर, पुलिस अधीक्षक आरती सिंह और राज्य महिला आयोग की सदस्य डॉ. मिथिलेश अग्रवाल सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। रामलीला कमेटी के पदाधिकारियों की मौजूदगी में आयोजित कार्यक्रम में विजयादशमी की परंपरा और धार्मिक आस्था की झलक देखने को मिली। लोगों ने उत्साह के साथ पर्व में सहभागिता की और रावण दहन के माध्यम से बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश आत्मसात किया।

रावण दहन के साथ दिया अहंकार और अधर्म के अंत का संदेश

विजयादशमी का पर्व भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने इसी दिन रावण का वध कर धर्म और सत्य की विजय का मार्ग प्रशस्त किया था। इसी परंपरा के तहत हर वर्ष दशहरे पर रावण के पुतले का दहन किया जाता है। फर्रुखाबाद के क्रिश्चियन कॉलेज ग्राउंड में भी इस परंपरा का निर्वहन करते हुए रावण दहन किया गया।

रावण का पुतला केवल एक पौराणिक पात्र का प्रतीक नहीं, बल्कि अहंकार, अन्याय, क्रोध, लालच और अधर्म जैसी बुराइयों का भी प्रतीक माना जाता है। रावण दहन के जरिए लोगों को यह संदेश दिया गया कि जीवन में चाहे कितनी भी कठिन परिस्थितियां क्यों न आएं, सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने वाले व्यक्ति को अपने सिद्धांतों से पीछे नहीं हटना चाहिए।

भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपनाने का आह्वान

विजयादशमी हमें याद दिलाती है कि शक्ति और सामर्थ्य का उपयोग दूसरों को दबाने के लिए नहीं, बल्कि धर्म, न्याय और लोककल्याण के लिए होना चाहिए। रावण विद्वान और शक्तिशाली होने के बावजूद अपने अहंकार और गलत निर्णयों के कारण विनाश को प्राप्त हुआ। वहीं भगवान श्रीराम ने मर्यादा, धैर्य, सत्य और कर्तव्य के बल पर विजय हासिल की।

इसी संदेश को जीवन में उतारना ही दशहरे की वास्तविक सार्थकता है। समाज में फैली बुराइयों को समाप्त करने, आपसी मतभेद भुलाने और भाईचारे को मजबूत बनाने के लिए ऐसे पर्व महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उत्सव के माहौल में नजर आई आस्था और परंपरा की झलक

क्रिश्चियन कॉलेज ग्राउंड में आयोजित विजयादशमी कार्यक्रम ने शहर की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत किया। कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारियों और गणमान्य व्यक्तियों की मौजूदगी रही। रावण दहन के साथ ही बुराई के अंत और अच्छाई की जीत का संदेश लोगों तक पहुंचा।

विजयादशमी का पर्व हर वर्ष नई ऊर्जा और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। यह हमें सिखाता है कि व्यक्ति को अपने भीतर मौजूद बुराइयों को पहचानकर उन्हें समाप्त करने का प्रयास करना चाहिए। सत्य, सदाचार, प्रेम, करुणा और नैतिकता जैसे मूल्यों को अपनाकर ही एक बेहतर समाज का निर्माण संभव है।

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Manoj Jauhri ब्यूरो चीफ (फर्रुखाबाद) - एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो राजनीति, अपराध, शिक्षा, मनोरंजन और स्थानीय समाचारों पर पोस्ट करते हैं। वे तथ्यों पर आधारित और विश्वसनीय समाचार सामग्री तैयार करने में विशेषज्ञता रखते हैं।
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