फर्रुखाबाद।
आवास विकास क्षेत्र स्थित एक निजी नर्सिंग होम में इलाज के दौरान डेढ़ साल के मासूम की मौत से परिवार में कोहराम मच गया। एटा जनपद के नयागांव थाना क्षेत्र के नावर गांव निवासी सूर्यांश को कुछ दिन पहले दस्त की शिकायत के बाद नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था। सुबह इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। बच्चे की मौत के बाद परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए सवाल खड़े किए हैं।
परिजनों के मुताबिक सूर्यांश को दस्त की समस्या होने पर आवास विकास स्थित नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था। वहां उसका इलाज चल रहा था। सुबह करीब 11 बजे डॉक्टर की ओर से बच्चे को किसी अन्य अस्पताल ले जाने की सलाह दी गई। मृतक के पिता आसेख उर्फ आशीष का आरोप है कि डॉक्टर द्वारा बाहर ले जाने की बात कहे जाने तक उनके बच्चे की मौत हो चुकी थी।
बच्चे के पिता ने इलाज की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि सूर्यांश की हालत गंभीर थी तो उसे पहले ही किसी बड़े अस्पताल के लिए रेफर किया जाना चाहिए था। उनका आरोप है कि समय रहते बेहतर उपचार के लिए रेफर किया जाता तो शायद बच्चे की जान बच सकती थी। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
मौत की खबर से मचा हड़कंप, पुलिस भी पहुंची
मासूम की मौत के बाद परिजनों में चीख-पुकार मच गई। घटना की सूचना डायल 112 पर दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और परिजनों से घटना की जानकारी ली। कुछ समय तक नर्सिंग होम में परिजन और पुलिस मौजूद रहे। मामले को लेकर मौके पर लोगों की भीड़ भी जुट गई।
करीब दो घंटे तक चली बातचीत और मौके की स्थिति के बाद परिजन बिना किसी कानूनी कार्रवाई के बच्चे का शव लेकर अपने गांव रवाना हो गए। पुलिस ने घटना की जानकारी दर्ज कर मामले की स्थिति को समझा।
जांच के बाद साफ होगी मौत की असली वजह
डेढ़ साल के मासूम की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल उसके इलाज और अंतिम समय में अस्पताल से बाहर ले जाने की सलाह को लेकर खड़ा हुआ है। परिवार का आरोप है कि बच्चे की हालत गंभीर होने के बावजूद उसे समय रहते उच्च चिकित्सा केंद्र के लिए रेफर नहीं किया गया। वहीं, मौत के वास्तविक कारण और इलाज में किसी तरह की लापरवाही हुई या नहीं, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
मामले में स्वास्थ्य विभाग की जांच या चिकित्सकीय अभिलेखों की समीक्षा होती है तो इससे यह स्पष्ट हो सकता है कि बच्चे की हालत कब बिगड़ी, उसे क्या उपचार दिया गया और रेफर करने का निर्णय किस समय लिया गया था। फिलहाल मासूम की मौत ने निजी नर्सिंग होम में बच्चों के इलाज और गंभीर मरीजों को समय पर रेफर किए जाने को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

