सिनेमा के इतिहास में कभी-कभार ऐसा चमत्कार होता है जो पूरी इंडस्ट्री के समीकरणों को हिलाकर रख देता है. 1975 में जो काम ‘जय संतोषी मां’ ने किया था, ठीक 50 साल बाद 2026 में वही करिश्मा संत नीम करोली बाबा के जीवन पर बनी फिल्म ‘हनुमान अंश’ ने कर दिखाया है।
महज 2 करोड़ रुपये के सीमित बजट में बनी इस फिल्म ने पहले हफ्ते में सिर्फ 90 लाख का मामूली बिजनेस किया था और दूसरे हफ्ते में इसके शो घटकर सिर्फ 40 स्क्रीन्स पर रह गए थे। लेकिन दो हफ्ते बाद ‘माउथ पब्लिसिटी’ और आस्था की ऐसी सुनामी आई कि सिनेपॉलिस इंडिया को इसे 2,000 से ज्यादा स्क्रीन्स पर ले जाना पड़ा। अब फिल्म ने भारत में 152 करोड़ रुपये से ज्यादा का नेट कलेक्शन (ग्रॉस करीब 180 करोड़ रुपये) कर इतिहास रच दिया है।
लेकिन इस ऐतिहासिक सफलता के बाद एक आम दर्शक के मन में सबसे बड़ा सवाल ये है कि इस 150 करोड़ रुपये में से किसे कितने पैसे मिलेंगे, सबसे ज्यादा कमाई किसकी होगी. फिल्म के हीरो की, डायरेक्टर की, प्रोड्यूसर की या फिर सिनेमाघर वालों की? आइए, फिल्म इंडस्ट्री के एक्सपर्ट और सीनियर जर्नलिस्ट लिपिका वर्मा के जरिए समझते हैं कि इस 150 करोड़ रुपये की कमाई का एक-एक रुपया कैसे और किसके बीच बंटता है।

