फर्रुखाबाद।
शहर के क्रिश्चियन इंटर कॉलेज मैदान में शाम आयोजित रावण दहन कार्यक्रम के दौरान आतिशबाजी के बीच उस समय अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई, जब कुछ लोग बैरिकेडिंग पार कर प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश कर गए। उन्हें बाहर निकालने पहुंची पुलिस से लोगों की नोकझोंक और कहासुनी हो गई। करीब 15 मिनट तक चले घटनाक्रम के बाद पुलिस ने लोगों को बाहर निकालकर स्थिति संभाली। वहीं, रावण दहन कार्यक्रम समाप्त होते ही बड़ी संख्या में लोगों के एक साथ सड़क पर निकलने से फतेहगढ़-फर्रुखाबाद मार्ग पर लंबा जाम लग गया। करीब एक घंटे तक यातायात प्रभावित रहने से राहगीरों और वाहन चालकों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।
आतिशबाजी के बीच बैरिकेडिंग पार कर अंदर घुसे लोग
जानकारी के मुताबिक, शाम करीब 6:30 बजे क्रिश्चियन इंटर कॉलेज मैदान में रावण दहन से पहले आतिशबाजी की जा रही थी। इसी दौरान कुछ लोग बैरिकेडिंग पार कर अंदर पहुंच गए। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर पुलिस ने जब उन्हें बाहर निकालने का प्रयास किया तो कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते पुलिस और संबंधित लोगों के बीच नोकझोंक की स्थिति बन गई।
करीब 15 मिनट तक चले इस घटनाक्रम के बाद पुलिस ने हस्तक्षेप करते हुए लोगों को बाहर निकाला और भीड़ को नियंत्रित किया। इसके बाद प्रतिबंधित क्षेत्र में लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई। हालांकि, इस घटनाक्रम ने बड़े सार्वजनिक आयोजन में बैरिकेडिंग और भीड़ नियंत्रण की व्यवस्था को लेकर सवाल जरूर खड़े कर दिए।
एक तरफ रावण दहन, दूसरी तरफ सड़क पर जाम का रावण!
रावण दहन के बाद शाम करीब 7:15 बजे बड़ी संख्या में लोग एक साथ मैदान से बाहर निकले। इसके चलते फतेहगढ़-फर्रुखाबाद मार्ग पर वाहनों की कतारें लग गईं। कुछ ही देर में जाम की स्थिति गंभीर हो गई और राहगीरों को निकलने में काफी परेशानी हुई।
करीब एक घंटे तक यातायात प्रभावित रहने से वाहन चालकों को जाम में फंसे रहना पड़ा। ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी यातायात सुचारु कराने और वाहनों को निकालने में जुटे रहे। सवाल यह है कि जब आयोजन में हजारों लोगों की भीड़ जुटने की संभावना थी, तो कार्यक्रम समाप्त होने के बाद लोगों की सुरक्षित निकासी और यातायात संचालन के लिए पर्याप्त इंतजाम किस स्तर पर किए गए थे?
एक लाख रुपये की आतिशबाजी, फिर भी पुतले जल्दी जलकर गिरे!
रामलीला कमेटी के अध्यक्ष लालजी टंडन और उप मंत्री रचित अग्रवाल के मुताबिक, कार्यक्रम पुलिस के सहयोग से शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। उन्होंने बताया कि पुलिस से नोकझोंक करने वाले लोग बाहरी थे और कमेटी के सदस्य नहीं थे।
कमेटी के अनुसार, कार्यक्रम में करीब एक लाख रुपये की आतिशबाजी चलाई गई। दूसरी ओर, मौके पर मौजूद लोगों के बीच इस बात की चर्चा रही कि रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ के पुतलों में आतिशबाजी अपेक्षाकृत कम लगाई गई थी, जिसके चलते तीनों पुतले कम समय में ही जलकर गिर गए। हालांकि, इस संबंध में कमेटी की ओर से अलग से कोई विस्तृत स्पष्टीकरण सामने नहीं आया।
सुरक्षा और यातायात व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत
रावण दहन जैसे बड़े सार्वजनिक आयोजनों में भीड़ नियंत्रण, बैरिकेडिंग की निगरानी, आपात स्थिति से निपटने और कार्यक्रम समाप्त होने के बाद यातायात को सुचारु बनाए रखने की जिम्मेदारी बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में बैरिकेडिंग पार कर लोगों के अंदर पहुंचने और बाद में मुख्य मार्ग पर करीब एक घंटे तक जाम लगने की घटना व्यवस्था की समीक्षा की आवश्यकता की ओर इशारा करती है।
अब सवाल यह है कि क्या आयोजन स्थल पर भीड़ के दबाव का पूर्व आकलन किया गया था? क्या कार्यक्रम समाप्त होने के बाद लोगों की निकासी के लिए पर्याप्त इंतजाम थे? और क्या मुख्य मार्ग पर यातायात को व्यवस्थित रखने के लिए पहले से कोई प्रभावी योजना बनाई गई थी?
