कायमगंज/ फर्रुखाबाद |
जिंदगी और मौत के बीच कभी-कभी महज चंद मिनटों का फासला रह जाता है। घर लौट रहे एक व्यक्ति ने पत्नी को फोन कर जल्द पहुंचने की बात कही, लेकिन उसे क्या पता था कि यह उसकी जिंदगी का आखिरी सफर साबित होगा। पत्नी से फोन पर हुई बातचीत के कुछ ही देर बाद सड़क हादसे में उसकी मौत की खबर पहुंच गई। परिवार की खुशियां पलभर में मातम में बदल गईं और दो मासूम बच्चों के सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया।
कायमगंज कोतवाली क्षेत्र के अलीगंज मार्ग पर कैसर खां अड्डे के पास दो बाइकों की आमने-सामने जोरदार भिड़ंत हो गई। हादसे में दि किसान सहकारी चीनी मिल में फिटर के पद पर कार्यरत लोकेंद्र यादव (38) गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद मृतक के परिवार में कोहराम मच गया।
रिश्तेदार के शोक कार्यक्रम से लौट रहे थे लोकेंद्र
जानकारी के अनुसार, मूल रूप से मैनपुरी जनपद के नगला हार निवासी लोकेंद्र यादव कायमगंज स्थित दि किसान सहकारी चीनी मिल में नौकरी करते थे। वर्ष 2017 से वह मिल में फिटर के पद पर कार्यरत थे और मिल परिसर में बने क्वार्टर में परिवार के साथ रहते थे।
बताया गया कि सुबह लोकेंद्र अपने पैतृक गांव गए थे, जहां एक रिश्तेदार के शोक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद वह वापस कायमगंज लौट रहे थे। इसी दौरान अलीगंज मार्ग पर कैसर खां अड्डे के निकट उनकी बाइक सामने से आ रही दूसरी बाइक से टकरा गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि लोकेंद्र गंभीर रूप से घायल हो गए।
राहगीरों ने बाइक सवार को पकड़कर पुलिस को सौंपा
हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई। मौके पर मौजूद राहगीरों ने तत्परता दिखाते हुए दूसरी बाइक के सवार को पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया। उधर, गंभीर रूप से घायल लोकेंद्र को अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। चिकित्सकों द्वारा मृत घोषित किए जाने के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
सूचना मिलने पर पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस मामले में आवश्यक कार्रवाई कर रही है।
पत्नी से आखिरी बातचीत ने हर आंख को किया नम
इस हादसे का सबसे दर्दनाक पहलू वह फोन कॉल है, जो लोकेंद्र ने दुर्घटना से कुछ ही मिनट पहले अपनी पत्नी कल्पना को किया था। बताया जाता है कि उन्होंने फोन पर कहा था, “बस पहुंच रहा हूं, पानी गर्म कर देना।”
पति के घर पहुंचने की प्रतीक्षा कर रही कल्पना को क्या मालूम था कि जिस आवाज को वह कुछ देर बाद फिर सुनने की उम्मीद कर रही हैं, वह अब हमेशा के लिए खामोश हो जाएगी। घर लौटने की तैयारी कर रहे परिवार को कुछ ही देर में लोकेंद्र की मौत की सूचना मिली तो घर में चीख-पुकार मच गई।
जिस घर में पति के लौटने का इंतजार हो रहा था, वहां अचानक मातम छा गया। इस घटना ने परिवार को ऐसा दर्द दिया, जिसकी भरपाई शायद ही कभी हो सके।
14 साल की बेटी परी और 9 साल के बेटे शिवांग के सिर से उठा पिता का साया
लोकेंद्र यादव अपने पीछे पत्नी कल्पना, 14 वर्षीय बेटी परी और नौ वर्षीय बेटे शिवांग को छोड़ गए हैं। पिता की असमय मौत से दोनों बच्चों के सिर से स्नेह और सुरक्षा का साया उठ गया। परिवार के लिए यह क्षति बेहद गहरी है।
चीनी मिल में नौकरी कर परिवार का भरण-पोषण करने वाले लोकेंद्र की मौत से परिजनों के सामने भावनात्मक संकट के साथ भविष्य की चिंताएं भी खड़ी हो गई हैं। हादसे की खबर मिलने के बाद से परिवार में मातम पसरा है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
