प्रशिक्षु आईएएस के निरीक्षण में परिषदीय विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था की खुली पोल

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फर्रुखाबाद।

जनपद में में प्रशिक्षु आईएएस द्वारा किए गए शिक्षा गुणवत्ता निरीक्षण में परिषदीय विद्यालयों की बदहाल स्थिति उजागर हो गई थी। निरीक्षण के दौरान कक्षा तीन और पांच के छात्र अपने माता-पिता का नाम तक नहीं लिख सके। इतना ही नहीं, जब बच्चों से ब्लैक बोर्ड पर कृष्ण और अर्जुन लिखने के लिए कहा गया तो कोई भी छात्र सही तरीके से नाम नहीं लिख पाया, जिससे शिक्षा स्तर की गंभीर स्थिति सामने आई।

निरीक्षण के दौरान परिषदीय विद्यालय दारापुर में प्रधानाध्यापक पुष्पेंद्र कुमार विद्यालय परिसर में कार में बैठकर मोबाइल चलाते हुए पाए गए। वहीं कुछ महिला शिक्षिकाएं बिना किसी सूचना के विद्यालय से अनुपस्थित मिलीं। विद्यालय में कुल 110 छात्रों के नामांकन के बावजूद निरीक्षण के समय मात्र 22 छात्र ही उपस्थित मिले। हैरानी की बात यह रही कि विद्यालय में सात नियमित शिक्षक और तीन शिक्षामित्र कार्यरत हैं, इसके बावजूद शिक्षा व्यवस्था बेहद कमजोर पाई गई।

भारतीय किसान यूनियन ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को दी थी। शिकायत के बाद विभाग द्वारा कार्रवाई करते हुए संबंधित शिक्षकों की मात्र एक वेतन वृद्धि रोकने की कार्रवाई की गई, लेकिन इस कदम से किसान यूनियन संतुष्ट नहीं हुई। संगठन के जिलाध्यक्ष अजय कटियार ने आरोप लगाया कि शिक्षा गुणवत्ता बेहद खराब होने के बावजूद विभागीय अधिकारियों ने शिक्षकों को बचाने का प्रयास किया और अपनी जिम्मेदारी पूरी तरह नहीं निभाई।इसके बाद संगठन ने मामले की शिकायत जिलाधिकारी से की। जिलाधिकारी ने प्रकरण की जांच मुख्य विकास अधिकारी को सौंप दी है। किसान यूनियन के पदाधिकारियों ने बताया कि यह समस्या केवल एक विद्यालय तक सीमित नहीं है। उन्होंने कायमगंज और मोहम्मदाबाद क्षेत्रों में भी भ्रमण किया, जहां लगभग सभी विद्यालयों में शिक्षा गुणवत्ता का स्तर चिंताजनक पाया गया। संगठन ने चेतावनी दी है कि गरीब किसानों के बच्चों के भविष्य के साथ लापरवाही किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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