खाद की किल्लत और कालाबाजारी पर प्रशासन सख्त: 2500 मीट्रिक टन उर्वरक पहुंचा, गड़बड़ी मिलने पर यहाँ करें शिकायत |

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Manoj Jauhri
Manoj Jauhri ब्यूरो चीफ (फर्रुखाबाद) - एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो राजनीति, अपराध, शिक्षा, मनोरंजन और स्थानीय समाचारों पर पोस्ट करते हैं। वे तथ्यों पर आधारित...
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फर्रुखाबाद।

रबी की फसल की तैयारियों के बीच खाद को लेकर परेशान किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। जिले में उर्वरकों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए 2500 मीट्रिक टन खाद की खेप पहुंच चुकी है। खेतों में बुवाई का समय नजदीक आने के साथ ही खाद की मांग बढ़ने लगी है। ऐसे में किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने और निर्धारित कीमत से अधिक वसूली पर अंकुश लगाने के लिए जिला प्रशासन और कृषि विभाग ने निगरानी तेज कर दी है। जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर के निर्देश पर कृषि विभाग की टीम ने कमालगंज, रजीपुर और खुदागंज स्थित सहकारी समितियों का निरीक्षण कर खाद की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था का जायजा लिया।

खाद की कालाबाजारी की तो सीधे कंट्रोल रूम में होगी शिकायत!

किसानों को खाद के लिए परेशान न होना पड़े और कोई विक्रेता मजबूरी का फायदा उठाकर अधिक कीमत न वसूल सके, इसके लिए कृषि विभाग ने विक्रेताओं को सख्त निर्देश दिए हैं। खाद की बिक्री निर्धारित सरकारी दरों पर ही करनी होगी। दुकानदारों और सहकारी समितियों को स्टॉक का उचित रिकॉर्ड रखने तथा खाद खरीदने वाले किसानों को पक्की रसीद देने के निर्देश दिए गए हैं। यदि कोई विक्रेता निर्धारित मूल्य से अधिक पैसे मांगता है या खाद वितरण में अनियमितता करता है, तो किसान चुप बैठने के बजाय सीधे प्रशासन से शिकायत कर सकते हैं।

शिकायत के लिए कंट्रोल रूम नंबर: 05692-297733

जिले में यूरिया और डीएपी का भी पर्याप्त भंडार

कृषि विभाग के अनुसार, जिले में उर्वरकों की उपलब्धता बनाए रखने के लिए पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, जिले में 26,131 मीट्रिक टन यूरिया और 10,351 मीट्रिक टन डीएपी का स्टॉक बताया गया है। इसके अलावा एनपीके समेत अन्य उर्वरक भी उपलब्ध हैं। विभाग का प्रयास है कि किसानों को फसल की जरूरत के अनुसार खाद मिलती रहे और बुवाई के महत्वपूर्ण समय में उन्हें अनावश्यक रूप से समितियों और दुकानों के चक्कर न लगाने पड़ें।

डीएपी के पीछे न भागें, एनपीके और एसएसपी भी हैं विकल्प

कृषि अधिकारियों ने किसानों को सलाह दी है कि वे केवल डीएपी पर निर्भर न रहें। फसल और मिट्टी की जरूरत के अनुसार एनपीके तथा सिंगल सुपर फास्फेट (एसएसपी) का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इन उर्वरकों का चयन फसल की आवश्यकता और कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार करना चाहिए। इससे खाद की मांग को संतुलित करने में मदद मिल सकती है और किसानों को उपलब्ध विकल्पों की जानकारी भी मिलेगी।

खाद लेने जाएं तो ये दस्तावेज जरूर रखें साथ

कृषि विभाग ने किसानों से खाद खरीदने के लिए जाते समय आधार कार्ड, खतौनी और फार्मर आईडी साथ रखने की अपील की है। जरूरी दस्तावेज होने से खाद वितरण की प्रक्रिया में सुविधा रहेगी। किसानों को यह भी सलाह दी गई है कि खाद खरीदते समय पक्की रसीद अवश्य लें और निर्धारित कीमत से अधिक भुगतान न करें।

प्रशासन की निगरानी में खाद वितरण, किसानों को राहत की उम्मीद

रबी सीजन में खाद की मांग बढ़ने के बीच 2500 मीट्रिक टन की नई खेप पहुंचना किसानों के लिए राहत की खबर है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि उपलब्ध खाद जरूरतमंद किसानों तक समय से पहुंचे और वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे। प्रशासन के निर्देशों और कृषि विभाग की निगरानी के बीच किसानों को उम्मीद है कि उन्हें खाद के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। वहीं, निर्धारित दर से अधिक वसूली या वितरण में गड़बड़ी की स्थिति में किसान कंट्रोल रूम पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

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Manoj Jauhri ब्यूरो चीफ (फर्रुखाबाद) - एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो राजनीति, अपराध, शिक्षा, मनोरंजन और स्थानीय समाचारों पर पोस्ट करते हैं। वे तथ्यों पर आधारित और विश्वसनीय समाचार सामग्री तैयार करने में विशेषज्ञता रखते हैं।
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