नेपाल चुनाव 2026: बालेन शाह की पार्टी RSP ऐतिहासिक जीत की ओर, पारंपरिक दल पीछे

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नेपाल चुनाव 2026: बालेन शाह की पार्टी RSP ऐतिहासिक जीत की ओर, पारंपरिक दल पीछे

काठमांडू: नेपाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। 2026 के आम चुनावों के शुरुआती रुझानों में रैपर से राजनेता बने बालेन्द्र शाह (बालेन शाह) की पार्टी राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टी (RSP) ऐतिहासिक जीत की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। पिछले साल हुए ‘Gen-Z’ विरोध प्रदर्शनों के बाद हुए इस पहले आम चुनाव में युवाओं का झुकाव नए राजनीतिक विकल्प की ओर स्पष्ट दिख रहा है।

ताजा रुझानों के अनुसार 275 सदस्यीय संसद के लिए हुए चुनाव में प्रत्यक्ष निर्वाचन वाली 165 सीटों में से शुक्रवार देर रात तक RSP लगभग 115 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। अगर यह रुझान परिणामों में बदलते हैं, तो 35 वर्षीय इंजीनियर-रैपर और पूर्व काठमांडू मेयर बालेन शाह नेपाल के अगले प्रधानमंत्री बनने की दौड़ में सबसे आगे माने जा रहे हैं।

दूसरी ओर नेपाल की पारंपरिक और लंबे समय तक सत्ता में रही पार्टियां नेपाली कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) इस चुनाव में काफी पीछे नजर आ रही हैं। शुरुआती रुझानों से संकेत मिल रहे हैं कि मतदाताओं, खासकर युवा वोटरों ने पुराने दलों से दूरी बनाते हुए नए नेतृत्व को मौका दिया है।

ओली के गढ़ झापा-5 में बड़ी सेंध

इस चुनाव का सबसे चौंकाने वाला नतीजा झापा-5 सीट से सामने आया है, जिसे पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली का मजबूत गढ़ माना जाता था। शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक यहां बालेन शाह ने बड़ी बढ़त बना ली है। शाह को लगभग 15,169 वोट मिले हैं, जबकि ओली को 3,344 वोट ही मिल सके। इस परिणाम ने नेपाल की राजनीति में बड़ा संदेश दिया है कि जनता अब पारंपरिक नेताओं से आगे बढ़कर नए चेहरों को मौका देने के लिए तैयार है।

काठमांडू में RSP का दबदबा

राजधानी काठमांडू में भी RSP को बड़ी सफलता मिलती दिख रही है। काठमांडू-1 सीट से RSP की उम्मीदवार रंजु दर्शन ने 15,455 वोटों के साथ जीत दर्ज की। वहीं काठमांडू-3 सीट से राजू नाथ पांडे ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी कुलमान घिसिंग को 7,586 वोटों के अंतर से हराकर प्रतिनिधि सभा में जगह बनाई।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि रुझान इसी तरह बने रहते हैं, तो यह चुनाव नेपाल की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत साबित हो सकता है, जहां युवा नेतृत्व और नई राजनीतिक ताकतें पारंपरिक दलों को कड़ी चुनौती देती नजर आएंगी।

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