कंपिल/कायमगंज/फर्रुखाबाद।
विजयादशमी के उल्लास के बीच कंपिल बाईपास पर आयोजित पारंपरिक दंगल में पहलवानों ने अपने दमखम, दांव-पेच और कुश्ती कला से दर्शकों को रोमांचित कर दिया। अखाड़े में कहीं जोरदार पटखनी के लिए जोर आजमाइश हुई तो कहीं बराबरी की टक्कर ने दर्शकों की धड़कनें बढ़ा दीं। रामलीला कमेटी की ओर से आयोजित इस विशाल दंगल में कुल 27 कुश्तियां हुईं। सबसे अधिक चर्चा मथुरा के भारत केसरी रामेश्वर सिंह यादव और हरेंद्र सिंह गुर्जर के बीच हुई 1 लाख 21 हजार रुपये की इनामी कुश्ती की रही, जो कड़े मुकाबले के बाद बराबरी पर छूटी। दोनों पहलवानों के बीच इनामी राशि बराबर बांट दी गई।

दंगल में एक से बढ़कर एक पहलवानों ने अखाड़े में उतरकर अपनी ताकत और तकनीक का प्रदर्शन किया। मुकाबलों के दौरान दर्शक तालियां बजाकर पहलवानों का उत्साह बढ़ाते रहे। बड़ी इनामी कुश्तियों को लेकर लोगों में खासा उत्साह दिखाई दिया। अखाड़े में पहलवानों की जोरदार भिड़ंत और दांव-पेच आकर्षण का केंद्र बने रहे।
रामेश्वर और हरेंद्र की भिड़ंत पर टिकी रहीं निगाहें, 1.21 लाख की कुश्ती बराबरी पर

दंगल का सबसे बड़ा मुकाबला मथुरा के भारत केसरी रामेश्वर सिंह यादव और हरेंद्र सिंह गुर्जर के बीच हुआ। दोनों पहलवानों ने जीत हासिल करने के लिए पूरा दमखम लगाया और एक-दूसरे पर बढ़त बनाने की कोशिश की। मुकाबले में दोनों तरफ से जोरदार जोर-आजमाइश देखने को मिली, लेकिन कोई भी पहलवान निर्णायक जीत हासिल नहीं कर सका। अंततः मुकाबला बराबरी पर समाप्त हुआ। इसके बाद 1 लाख 21 हजार रुपये की इनामी राशि दोनों पहलवानों के बीच बराबर बांट दी गई।
इस मुकाबले को देखने के लिए अखाड़े के आसपास बड़ी संख्या में दर्शक जुटे रहे। दोनों पहलवानों की ताकत और कुश्ती कौशल ने लोगों को खूब प्रभावित किया।
रामलीला कमेटी ने कराया भव्य दंगल, अतिथियों ने किया शुभारंभ
कंपिल बाईपास पर आयोजित दंगल का शुभारंभ प्रमुख उद्योगपति एवं समाजसेवी सत्यप्रकाश अग्रवाल, भाजपा नेता डॉ. विकास शर्मा, समाजसेवी पुखराज डागा, पूर्व चेयरमैन उदयपाल सिंह यादव और रामलीला कमेटी के अध्यक्ष नीरज पाण्डेय ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया। इसके बाद पहलवानों के हाथ मिलवाकर मुकाबलों की शुरुआत कराई गई।
प्रथम सेले की मुख्य कुश्ती एसडीएम अभिषेक वर्मा ने अखाड़े में पहुंचकर दोनों पहलवानों के हाथ मिलवाने के बाद शुरू कराई। इस दौरान आयोजन से जुड़े लोगों ने पहलवानों का उत्साह बढ़ाया और दर्शकों ने तालियों के साथ उनका स्वागत किया।
अरविंद यादव ने मारी बाजी, एक लाख रुपये की कुश्ती अपने नाम की
दंगल के दूसरे सेले में हाथरस के अरविंद यादव और हरियाणा के रोहतक निवासी भारतीय सेना के पहलवान आशीष के बीच जोरदार मुकाबला हुआ। दोनों पहलवानों ने अपनी कला और ताकत का प्रदर्शन करते हुए एक-दूसरे को चुनौती दी। आखिरकार अरविंद यादव ने मुकाबले में जीत दर्ज कर एक लाख रुपये की इनामी कुश्ती अपने नाम कर ली।
अरविंद की जीत के साथ ही अखाड़े में उत्साह का माहौल बन गया। दर्शकों ने तालियां बजाकर विजेता पहलवान का उत्साहवर्धन किया।
राजेश पहलवान ने रॉकी को दी पटखनी, 51 हजार की कुश्ती जीती
तीसरे सेले में राजेश पहलवान और हरियाणा के रॉकी पहलवान के बीच मुकाबला हुआ। दोनों पहलवानों ने जीत के लिए जोर लगाया, लेकिन राजेश पहलवान ने बाजी मारते हुए 51 हजार रुपये की इनामी कुश्ती जीत ली। इस मुकाबले ने भी दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींचा।
आगरा-दिल्ली के पहलवानों में कांटे की टक्कर, दो बड़ी कुश्तियां बराबरी पर छूटीं
चौथे सेले में आगरा के सुरेश पहलवान और दिल्ली के रमन चौधरी के बीच 41 हजार रुपये की कुश्ती कराई गई। दोनों पहलवानों ने एक-दूसरे पर बढ़त बनाने का प्रयास किया, लेकिन मुकाबला बराबरी पर समाप्त हुआ।
वहीं, पांचवें सेले में दिल्ली केसरी रिंकू पहलवान और राजस्थान केसरी मोना पहलवान के बीच 21 हजार रुपये की इनामी कुश्ती हुई। इस मुकाबले में भी दोनों पहलवानों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली और मुकाबला बराबरी पर छूटा।
स्थानीय पहलवानों ने भी दिखाया दमखम, 27 मुकाबलों से गुलजार रहा अखाड़ा
दंगल में स्थानीय और आसपास के क्षेत्रों से आए पहलवानों ने भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। फर्रुखाबाद के जीतू यादव ने मुकाबले में जीत दर्ज की। वहीं, मोहम्मदाबाद के राहुल की 11 हजार रुपये की कुश्ती भी दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बनी रही।
जैथरा के भूरे पहलवान और अलीगंज के भूरे पहलवान के बीच हुई कुश्ती बराबरी पर समाप्त हुई। अलग-अलग भार वर्गों और इनामी मुकाबलों में पहलवानों ने अपने दांव-पेच से दर्शकों का मनोरंजन किया।
परंपरा और खेल भावना का संगम बना कंपिल का दंगल
कंपिल बाईपास पर आयोजित इस दंगल में कुल 27 कुश्तियों के जरिए पहलवानों ने अपनी प्रतिभा और दमखम का प्रदर्शन किया। बड़े इनामी मुकाबलों से लेकर स्थानीय पहलवानों की कुश्तियों तक, हर मुकाबले में दर्शकों की दिलचस्पी बनी रही।
