एटा में संत गाडगे महाराज की 150वीं जयंती धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाई गई
एटा। जनपद एटा में संत गाडगे महाराज की 150वीं जयंती बड़े ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। कार्यक्रम का आयोजन नारायण वाटिका में समाज के लोगों द्वारा किया गया, जहां शहरभर से सैकड़ों लोग और धोबी समाज के सदस्य उपस्थित हुए।
इस अवसर पर समाज के कार्यकर्ताओं ने संत गाडगे महाराज के आदर्शों और उनके प्रवचनों को जन-जन तक पहुँचाने का संदेश दिया। स्वच्छता और शिक्षा के प्रति उनके योगदान को याद करते हुए वक्ताओं ने समाज को उनके बताए मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
जयंती समारोह की शुरुआत भव्य शोभायात्रा से हुई, जिसमें ढोल-नगाड़ों की थाप और बैंड-बाजों के साथ सैकड़ों लोग शामिल हुए। शोभायात्रा को मेले का रूप दिया गया और इसे देखकर उपस्थित लोगों में उत्साह और उमंग की लहर दौड़ गई। महिलाओं ने भी इस कार्यक्रम में विशेष भागीदारी दिखाई।
कार्यक्रम स्थल पर संत गाडगे महाराज के चित्र पर पुष्प अर्पित किए गए और उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया गया। इस अवसर पर उपस्थित सभी अतिथियों को शॉल, प्रतीक चिन्ह और फूल-मालाओं से सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में रमेश चंद दिवाकर (पूर्व जिला जज) मौजूद रहे। विशिष्ट अतिथियों में मारहरा विधायक वीरेंद्र सिंह लोधी, एटा सदर विधायक की पत्नी प्रेमलता वर्मा डेविड, राकेश गांधी, मेधाव्रत शास्त्री, भाजपा जिला अध्यक्ष प्रमोद गुप्ता, राजेंद्र दिवाकर, दानवीर सिंह दिवाकर, सत्यवीर दिवाकर, पप्पू दिवाकर, सपना सिंह बौद्ध, अमर सिंह दिवाकर, शशिकांत फौजी सहित शहर के गणमान्य लोग व जनपद के सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन अरुण दिवाकर, ओमपाल दिवाकर, बालकराम माथुर और धर्मवीर दिवाकर ने किया। अतिथियों और उपस्थित लोगों के लिए जलपान की भी विशेष व्यवस्था की गई।
इस अवसर पर बाबा साहब भीमराव अंबेडकर द्वारा रचित संविधान पर भी प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने संविधान की प्रमुख विशेषताओं, नागरिकों के अधिकार और कर्तव्यों को समझाया और सभी को संविधान के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया।
वक्ताओं ने संत गाडगे महाराज के संदेश को साझा करते हुए कहा कि उनका प्रसिद्ध नारा — *“आधी रोटी खाओ, बच्चों को पढ़ाओ। बर्तन नहीं है तो हाथ पर रखकर खाओ”* — आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने समाज को स्वच्छता, शिक्षा और समानता के रास्ते पर चलने की सीख दी, जो वर्तमान समय में भी अत्यंत प्रासंगिक है।
समारोह के अंत में उपस्थित लोगों ने संत गाडगे महाराज के बताए मार्ग पर चलने और समाज में शिक्षा, स्वच्छता तथा सामाजिक एकता का संदेश फैलाने का संकल्प लिया। इस जयंती ने शहरवासियों को संत गाडगे महाराज के आदर्शों और बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के संविधानिक दृष्टिकोण से जोड़ते हुए एक सकारात्मक संदेश दिया।
