Article : प्रदूषण बढ़ा, लेकिन बजट कम हो गया

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प्रदूषण बढ़ा, लेकिन बजट कम हो गया

डॉ. विजय गर्ग

आज के समय में प्रदूषण केवल एक पर्यावरणीय समस्या नहीं रह गया है, यह स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था और भविष्य से जुड़ी गंभीर संकट बन गई है। हवा में विषाक्त कणों, पानी में रासायनिक गंदगी और मिट्टी में प्लास्टिक पर औद्योगिक भ्रष्टाचार ये सभी मिलकर जीवन की गुणवत्ता को कम कर रहे हैं। लेकिन दुख की बात यह है कि जब प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है, तो इसे रोकने के लिए निर्धारित बजट घटता जा रहा है।

शहरों में वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। कारखानों का धुआं, निर्माण कार्यों की धूल और खुले में कचरा जलाने की प्रथा हवा को विषाक्त बना रही है। गांवों में भी कीटनाशकों और रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से पानी और मिट्टी प्रदूषित हो रही है। इस स्थिति में सरकारों से अपेक्षा की जाती है कि वे पर्यावरण संरक्षण पर अधिक ध्यान दें और बड़ा बजट रखें।

लेकिन यदि पर्यावरण विभागों के लिए धन कम कर दिया जाता है, तो निगरानी प्रणालियां कमजोर हो जाती हैं। प्रदूषण मापने वाले स्टेशनों की संख्या कम हो जाती है, सफाई अभियान अधूरे रह जाते हैं और जागरूकता कार्यक्रमों को पर्याप्त सहयोग नहीं मिलता। इसका परिणाम यह होता है कि कानून मौजूद होने के बावजूद उनका उचित तरीके से पालन नहीं किया जा सकता।

प्रदूषण न केवल प्रकृति को, बल्कि मानव स्वास्थ्य को भी बुरी तरह प्रभावित करता है। श्वसन रोग, हृदय रोग और त्वचा संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। उपचार पर खर्च बढ़ता है, जिससे आर्थिक बोझ भी बढ़ जाता है। यदि पर्यावरण संरक्षण के लिए बजट में कटौती की जाती है, तो दीर्घावधि में स्वास्थ्य क्षेत्र पर होने वाला खर्च कई गुना हो सकता है।

इस समस्या का समाधान न केवल सरकारी बजट से, बल्कि साझा जिम्मेदारी से भी संभव है। सरकार को पर्यावरण संरक्षण के लिए उचित धनराशि उपलब्ध करानी चाहिए, सख्त निगरानी करनी चाहिए और हरित प्रौद्योगिकी को प्रोत्साहन देना चाहिए। साथ ही, नागरिकों को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए जैसे कि प्लास्टिक का उपयोग कम करना, पौधे लगाना और जनता का उपयोग करना।

अंत में, वायु प्रदूषण बढ़ गया, लेकिन बजट कम हुआ। यह एक चिंताजनक वास्तविकता है। यदि हम आज पर्यावरण में निवेश नहीं करते हैं, तो भविष्य में इसकी कीमत कई गुना अधिक चुकानी पड़ेगी। स्वच्छ हवा, शुद्ध जल और स्वस्थ पृथ्वी न केवल हमारा अधिकार है, बल्कि हमारी जिम्मेदारी भी है।

डॉ. विजय गर्ग सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य शैक्षिक स्तंभकार मलोट पंजाब

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