Article : बार्बी डॉल : एक गुड़िया से वैश्विक सांस्कृतिक प्रतीक बनने तक का सफर।

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बार्बी डॉल : एक गुड़िया से वैश्विक सांस्कृतिक प्रतीक बनने तक का सफर।

-सुनील कुमार महला

आखिर कौन है जिसने ‘बार्बी डॉल’ का नाम नहीं सुना है ? बार्बी वह गुड़िया रही है जिसने विशेषकर छोटे बच्चों विशेषकर लड़कियों की खेलने की दुनिया ही बदल दी।बार्बी ने अब तक बच्चों की कल्पनाओं, करियर और बदलाव का सफर तय किया है। कौन जानता था कि बार्बी दुनिया में इतनी प्रसिद्ध हो जाएगी। यह खिलौना मात्र नहीं है बल्कि यह तो बच्चों के अनगिनत सपनों की गुड़िया है, यह प्रतीक है।इसकी लोकप्रियता के तो कहने ही क्या हैं? सच तो यह है कि बार्बी ने समाज पर अपनी अमिट छाप छोड़ी है। पाठकों को बताता चलूं कि बार्बी गुड़िया जब 1959 में पहली बार न्यूयॉर्क खिलौना मेले में प्रस्तुत की गई, तब उसका रूप उस समय की अन्य गुड़ियाओं से बिल्कुल अलग था। दरअसल, उस दौर में ज्यादातर गुड़ियाएँ छोटे बच्चों या शिशुओं के रूप में बनाई जाती थीं, लेकिन बार्बी को एक युवती के रूप में डिजाइन किया गया था। उसका शरीर किसी वयस्क महिला जैसा था, लंबे पैर, पतली कमर और स्टाइलिश व्यक्तित्व के साथ उसे एक फैशन मॉडल की तरह बनाया गया था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार पहली बार्बी ने काले-सफेद धारीदार (ब्लैक एंड व्हाइट) स्विमसूट पहना हुआ था। उसके बाल सुनहरे या भूरे रंग के पोनीटेल स्टाइल में थे। इतना ही नहीं, उसके पैरों में हाई हील सैंडल और कानों में छोटे-छोटे ईयररिंग्स थे, जिससे उसका रूप आधुनिक और फैशनेबल दिखाई देता था। उस समय उसकी आंखें हल्की-सी नीचे की ओर झुकी हुई दिखाई देती थीं, जिन्हें बाद में बदलकर सामने देखने वाला बनाया गया।

बार्बी का यह रूप उस समय की लड़कियों के लिए खास था, क्योंकि वे उसके माध्यम से खुद को भविष्य में अलग-अलग भूमिकाओं में कल्पना कर सकती थीं। यही कारण है कि यह गुड़िया जल्द ही बेहद लोकप्रिय हो गई और खिलौनों की दुनिया में एक नया अध्याय शुरू हुआ। बहरहाल, पाठकों को बताता चलूं कि 9 मार्च 1959 को अमेरिकी खिलौना कंपनी मैटल ने इस गुड़िया यानी कि बार्बी डॉल को मेले में प्रस्तुत किया था तथा इसका निर्माण कंपनी की सह-संस्थापक रूथ हैंडलर द्वारा किया गया था। दरअसल, उन्होंने यह देखा कि उस समय बाजार में मिलने वाली अधिकांश गुड़ियाएँ छोटे बच्चों के रूप में बनाई जाती थीं, जबकि लड़कियाँ खेलते समय खुद को बड़े होकर अलग-अलग भूमिकाओं जैसे कि डॉक्टर, शिक्षक, वैज्ञानिक, खिलाड़ी या अन्य पेशों में कल्पना में देखना चाहती थीं। इसी विचार से प्रेरित होकर उन्होंने एक ऐसी गुड़िया बनाने का निर्णय लिया, जो एक वयस्क महिला के रूप में हो और जिसके माध्यम से लड़कियाँ अपने भविष्य के सपनों और करियर की कल्पना कर सकें। 9 मार्च 1959 को न्यूयॉर्क टॉय फेयर में जब बार्बी ने अपना डेब्यू किया, तो उसने खिलौनों की दुनिया को नई दिशा दी। पाठकों को बताता चलूं कि लॉन्च होते ही यह गुड़िया बेहद लोकप्रिय हो गई और धीरे-धीरे केवल एक खिलौना नहीं, बल्कि एक वैश्विक सांस्कृतिक प्रतीक बन गई। समय के साथ इसके हजारों अलग-अलग रूप बनाए गए, जिनमें विभिन्न देशों की पोशाकें, जीवन-शैलियाँ और अनेक पेशे भी शामिल किए गए और इसी ऐतिहासिक शुरुआत की स्मृति में हर वर्ष 9 मार्च को ‘बार्बी दिवस’ मनाया जाता है, जब दुनिया भर में खिलौना प्रेमी, संग्राहक और बच्चे कार्यक्रमों, प्रदर्शनों और सोशल मीडिया के माध्यम से बार्बी की लोकप्रियता का उत्सव मनाते हैं।बार्बी गुड़िया के बारे में कई ऐसे रोचक तथ्य भी हैं जो बहुत कम लोगों को पता हैं। सबसे पहले, बार्बी का पूरा नाम बारबरा मिलिसेंट रॉबर्ट्स है, जो रुथ हैंडलर की बेटी बारबरा के नाम पर रखा गया था। इसी तरह बार्बी के बॉयफ्रेंड केन का नाम रुथ हैंडलर के बेटे केनेथ के नाम पर रखा गया। 1959 में जब पहली बार्बी लॉन्च हुई, तब इसकी कीमत लगभग 3 डॉलर थी, जबकि आज दुर्लभ और कलेक्टर एडिशन बार्बी गुड़ियाएँ हजारों डॉलर में बिकती हैं। बार्बी के शुरुआती डिजाइन की प्रेरणा जर्मनी की बिल्ड लिली डॉल(दुनिया की पहली आधुनिक फैशन गुड़ियों में से एक) से मानी जाती है, जो एक कॉमिक स्ट्रिप पर आधारित गुड़िया थी। पाठकों को बताता चलूं कि इसे वर्ष 1955 में जर्मनी में बनाया गया था। यह गुड़िया मूल रूप से बच्चों के लिए नहीं बल्कि वयस्कों के लिए बनाया गया था। उल्लेखनीय है कि इसका चरित्र जर्मनी के प्रसिद्ध अख़बार बिल्ड में प्रकाशित एक कॉमिक स्ट्रिप की पात्र लिली पर आधारित था। दरअसल, बिल्ड लिली लंबी, पतली और फैशनेबल कपड़ों में दिखाई जाती थी तथा उसके सुनहरे बाल, हाई हील्स और आकर्षक कपड़े उसकी विशेष पहचान थे।

अमेरिकी कंपनी मैटल की सह-संस्थापक रूथ हैंडलर ने यूरोप यात्रा के दौरान बिल्ड लिली गुड़िया देखी और बाद में इससे प्रेरित होकर उन्होंने 1959 में प्रसिद्ध गुड़िया बार्बी बनाई। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि 1964 में मैटल ने बिल्ड लिली के अधिकार खरीद लिए और बाद में इसका निर्माण बंद कर दिया। दिलचस्प बात यह है कि पहली बार्बी ने ब्लैक-एंड-व्हाइट धारीदार स्विमसूट पहना था और उसकी आंखों की पुतलियाँ नीचे की ओर झुकी हुई थीं। बाद में 1971 में उसका लुक बदलकर उसे सामने देखने वाला बनाया गया।समय के साथ बार्बी डॉल में हमें अनेक करियर देखने को मिले। मसलन,डॉक्टर, पायलट, कंप्यूटर इंजीनियर, खिलाड़ी, वैज्ञानिक और राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार वगैरह वगैरह।सच तो यह है कि बार्बी डॉल केवल और केवल फैशन डॉल ही नहीं रही, बल्कि उसने 250 से अधिक करियर अपनाए। यहां तक कि बार्बी डॉल ने 1965 में एस्ट्रोनॉट बार्बी का रूप भी अपनाया, जो इंसान के चंद्रमा पर पहुँचने (1969) से लगभग चार साल पहले ही महिलाओं की अंतरिक्ष यात्रा की कल्पना को दर्शाती थी। इतना ही नहीं, बार्बी में विविधता भी धीरे-धीरे जोड़ी गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 1968 में क्रिस्टी बार्बी नाम की अश्वेत गुड़िया (बार्बी की सहेली) पेश हुई, जबकि 1980 में पहली आधिकारिक ब्लैक बार्बी लॉन्च की गई। आज बार्बी अलग-अलग नस्लों, संस्कृतियों और शारीरिक बनावट जैसे सुडौल, लंबी और छोटी में भी बनाई जाती है। साथ ही कुछ गुड़ियाओं में व्हीलचेयर और हियरिंग एड जैसी दिव्यांगता का प्रतिनिधित्व भी शामिल है। पाठकों को जानकारी प्राप्त करके बिल्कुल भी हैरानी नहीं होनी चाहिए कि बार्बी दुनिया की सबसे अधिक बिकने वाली गुड़ियाओं में से एक है।

एक उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह दुनिया के 150 से अधिक देशों में बिकती है और अब तक इसकी अरबों की संख्या में गुड़ियाएँ बेची जा चुकी हैं। बार्बी का एक काल्पनिक परिवार और दोस्त भी बनाए गए हैं, जिनमें केन के अलावा उसकी बहन स्किपर और कई अन्य दोस्त शामिल हैं, जिससे बच्चों के खेल की दुनिया और विस्तृत हो गई। समय के साथ इसकी लोकप्रियता में इतना अधिक इजाफा हुआ है कि इस पर कई एनिमेटेड फिल्में और टीवी शो बनाए गए और साल 2023 में इसी किरदार पर आधारित फिल्म Barbie भी रिलीज़ हुई, जिसने वैश्विक स्तर पर बड़ी सफलता हासिल की। बार्बी से जुड़ा एक और रोचक तथ्य यह है कि दुनिया की सबसे महंगी बार्बी लगभग 302,500 डॉलर (करीब 2.5 करोड़ रुपये) में नीलाम हुई थी, जिसमें असली गुलाबी हीरा जड़ा हुआ था। अंत में यही कहूंगा कि बार्बी डॉल का सफर रूढ़िवादिता से सशक्तीकरण की ओर रहा है। जहाँ शुरुआत में इसे केवल सुंदरता के एक सीमित मानक के रूप में देखा गया, वहीं आज यह विविधता और समावेशिता का वैश्विक चेहरा बन चुकी है।यह बात ठीक है कि शुरुआत में अवास्तविक शारीरिक बनावट के लिए इसकी आलोचना हुई, जिससे किशोरियों के आत्मविश्वास पर असर पड़ने की बात कही गई। हालांकि, अब मैटल(अमेरिकी कंपनी)ने इसमें सुधार किया है।यह खिलौना अब केवल बच्चों के मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि महिलाओं की असीमित क्षमताओं और समाज में उनकी बदलती भूमिका का एक सशक्त प्रतीक है। संक्षिप्त रूप में यह बात कही जा सकती है कि बार्बी केवल एक खिलौना नहीं, बल्कि बदलते समाज का आईना है।

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